
ना करें किसी की निजी बातों को सार्वजनिक
नाराज़गी, निंदा या अपनेपन के नाम पर किसी की निजी बातों को सार्वजनिक करना मानसिक हिंसा है। इससे व्यक्ति का आत्मबल टूटता है और विश्वास खत्म होता है। निजता की रक्षा हमारा कर्तव्य है, क्योंकि हर व्यक्ति की निजता उसका अधिकार है।












