"रेंटर या केयरटेकर ....आप क्या है?" --
लेखक – रचना मिश्रा पांडे
आज के बदलते परिवेश में सब कुछ बदल गया है, यहांँ तक की धोखा देने का तरीका भी ।
कुछ समय पहले संपन्न लोग अपने मकान के लिए किसी ऐसे व्यक्ति को रखते थे, जो उस घर को अपना जैसा समझे तथा मलिक की अनुपस्थिति में भी घर का ध्यान रख सके ,जैसे साफ -सफाई ,फूल पौधों में पानी देना ,जैसे काम का ध्यान रखना। इन कामों के लिए उन्हें पैसे दिए जाते थे।
लेकिन आज यही काम पैसे लेकर अपनेपन के नाम पर करवाए जाते हैं। और किसी अनजाने मानसिक बंधन में बधा व्यक्ति सब कुछ करता चला जाता है ,यही सचेत होने की आवश्यकता है।
अक्सर पैसे कमाने ,पढ़ाई लिखाई, या किसी अन्य कारण से अपना शहर छोड़ कर लोगों को दूसरे शहर में जाकर रहना पड़ता है। और व्यक्ति किराए पर रहने के लिए विवश हो जाता है। ऐसे में बड़ी गंभीर समस्या यह है कि बाहरी व्यक्ति कैसे पहचाने कि जहांँ वह किराए पर रह रहा है वहांँ मालिक को सचमुच रेंटर चाहिए था ,या केयरटेकर?
यहांँ आवश्यक है कि हम सर्वप्रथम रेंटर और केयरटेकर के बीच के अंतर को समझ सकें,
रेंटर पैसे देकर घर में सुरक्षित और स्वतंत्र रूप से रहता है ,
जबकि केयरटेकर 24 घंटे की निगरानी तथा एक मानसिक और भावनात्मक दबाव में रहता है।
तो यदि आप भी कहीं किराए पर रह रहे हो ,तथा भावनात्मक और मानसिक दबाव महसूस कर रहे हो, तो अपने समायोजन पर संदेह करने से पूर्व थोड़ा ठहरिए और सोचिए कहीं आप भी रेंटर के नाम पर केयरटेकर की स्थिति में तो नहीं है ?
कुछ संकेतों पर ध्यान देकर आप अपनी परिस्थिति को आसानी से समझ सकते हैं-
पहला संकेत:- भावनात्मक दबाव-
"अपने जैसे हो ,परिवार जैसे रहो" जैसे भावनात्मक वाक्य को बोलकर मकान मालिक आपको एक भावनात्मक दबाव में डाल देता है, जिससे वह जब चाहे आपका इस्तेमाल कर सके ,और आप अपनेपन के नाम पर कुछ बोल भी नही पाते।
दूसरा संकेत:- नाम मात्र का संवाद-
यदि आपसे कोई काम ना हो तो "कैसे हो? "क्या कर रहे हो?" जैसे औपचारिक बातों की आवश्यकता भी वह आपके साथ नहीं समझते।
तीसरा संकेत :-अनदेखा करना-
अपने कामों में वह आपको अपनेपन के नाम पर बखूबी इस्तेमाल करेंगे, किंतु आपकी बीमारी, आपकी आवश्यकता, या आपकी किसी विपरीत परिस्थिति में वह आपको अनदेखा करेंगे।
चौथा संकेत :-विरोध करने पर अलगाव-
किसी बात का विरोध करने पर या उसके किसी कार्य को मना करने पर आपकी पूर्णत: उपेक्षा करना, पर्व त्यौहार या किसी उत्सव में शामिल न करना ,अकेला करना, आपके समक्ष किसी दूसरे किराएदार को अधिक महत्व देना ,हर समय महसूस कराना कि तुम्हारा स्थान नीचा है बराबरी का नहीं ।
अर्थात एक ऐसा नाम हीन चोट जिसकी चर्चा आप स्वयं से भी ना कर पाएँ ।
लेकिन आपका सम्मान आपका अधिकार है, अतः इन परिस्थितियों को शीघ्रता से पहचान कर समझे की सीमा टूट रही है ,तथा यथा -शीघ्र स्थान परिवर्तन की ओर अग्रसर हो जाएं ।आवश्यकता पड़ने पर परिवार या दोस्त को शामिल करें।
लेकिन यदि रेंट पर घर लेने से पूर्व कुछ सावधानियां बरतें तो आप इन परिस्थितियों मैं पड़ने से बच सकते हैं,
पहले- अपनापन दिखाने वाले शब्दों से बचें ।
अनजान शहर में, अनजान लोगों के बीच व्यक्ति अपनापन दिखाने वाले वाक्यों से बहुत जल्दी फंँस जाता हैं, और बाद में उसे कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसलिए अपनापन दिखलाने वाले वाक्यों से बच कर रहे ।
और दूसरा तथा महत्वपूर्ण ध्यान देने योग्य बात यह है कि हमेशा लिखित समझौते और सीमाएं तय करें, जैसे- रेंट ,बिजली बिल आदि पूर्व निर्धारित रहे ।
ध्यान रहे- जहांँ मकान मालिक आपसे जितना स्पष्ट और सीधा बात करता है, वहांँ रहना आपके लिए उतना ही सुरक्षित होगा।
अतः रेंटर और केयरटेकर के बीच की रेखा बहुत पतली है, लेकिन समझने योग्य है ।
अपनापन दिखाने वाला व्यवहार हमेशा अपनापन नहीं होता, सतर्क रहें और स्वयं तय करें ,कि आप रेंटर हैं या रेंट देने वाले केयरटेकर!
— रचना मिश्रा पांडे

इस खबर से जुड़े सवाल :
- क्या आप कभी किराए पर रहते हुए मानसिक या भावनात्मक दबाव महसूस कर चुके हैं?
- क्या आपको लगता है कि “अपनेपन” के नाम पर किराएदारों का शोषण बढ़ रहा है?
- आपके अनुसार रेंटर और केयरटेकर के बीच सबसे बड़ा अंतर क्या है?
- क्या मकान किराए पर लेने से पहले लिखित समझौता न होना एक बड़ी गलती साबित हो सकता है?
- क्या आपने कभी महसूस किया कि आप रेंटर नहीं बल्कि केयरटेकर की भूमिका निभा रहे हैं?
- अनजान शहर में किराए पर रहते समय सबसे बड़ी सावधानी क्या होनी चाहिए?
- क्या भावनात्मक शब्दों का उपयोग करके मकान मालिक दबाव बनाते हैं—आपकी राय क्या है?









