अयोध्या/वाराणसी: साल 2026 की पहली सुबह ने एक ऐसी तस्वीर पेश की है, जिसने पुराने सारे ट्रेंड्स को पीछे छोड़ दिया है। अगर आप सोच रहे थे कि आज की पीढ़ी (Gen-Z) नए साल का जश्न सिर्फ क्लबों में डीजे की धुन पर या पहाड़ों की वादियों में मना रही है, तो आप गलत हैं। इस बार युवाओं का सैलाब पब की तरफ नहीं, बल्कि मथुरा, काशी और अयोध्या के मंदिरों की ओर उमड़ पड़ा है।
1. काशी में 'डमरू' की गूंज और युवाओं का जोश
वाराणसी के काशी विश्वनाथ धाम में नज़ारा कुछ ऐसा था कि प्रशासन के भी पसीने छूट गए। भीड़ इतनी बढ़ी कि दर्शन की व्यवस्था ही बदलनी पड़ी।
- नया अपडेट: पहले 4 द्वारों से एंट्री मिलती थी, लेकिन युवाओं की भारी भीड़ को देखते हुए अब 5 द्वारों को खोल दिया गया है।
- आंकड़े: पिछले एक हफ्ते में करीब 20 लाख से ज्यादा लोग बाबा के दर्शन कर चुके हैं, जिनमें सबसे ज्यादा तादाद 18 से 25 साल के युवाओं की है।
- वाइब: वहां कोई शांत खड़ा नहीं था; युवा अपने दोस्तों के साथ ढोल-नगाड़ों पर थिरकते हुए और महादेव के जयकारे लगाते हुए नए साल का स्वागत कर रहे थे।
2. कान्हा की नगरी में 'राधे-राधे' का ट्रेंड
मथुरा और वृंदावन में तो जैसे आस्था का 'कार्निवल' चल रहा हो। बांके बिहारी और राधावल्लभ मंदिरों की गलियों में सजे-धजे युवाओं की टोलियां हाथ में माला लिए और जुबां पर 'राधे-राधे' का नाम लिए झूमती दिखीं।
"हमे लगा था कि Gen-Z सिर्फ कैफे जाना पसंद करती है, लेकिन यहाँ गोकुल और बरसाना की कुंज गलियों में युवाओं की मस्ती और भक्ति का जो कॉम्बो दिखा, वो वाकई बेमिसाल है।" — एक स्थानीय दुकानदार
3. अयोध्या: सरयू की लहरें और राम नाम की गूंज
प्रभु राम की नगरी अयोध्या में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के बावजूद युवाओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। सरयू घाट पर सुबह-सुबह डुबकी लगाकर युवाओं ने अपने नए साल के संकल्प (New Year Resolutions) लिए। अब 'चेक-इन' और 'सेल्फी' सिर्फ पार्टी स्पॉट्स पर नहीं, बल्कि भव्य मंदिरों के सामने लिए जा रहे हैं।
क्यों बदल रहा है Gen-Z का टेस्ट?
2026 की यह शुरुआत एक बड़े बदलाव की ओर इशारा कर रही है। आज का युवा अपनी सांस्कृतिक पहचान (Cultural Identity) को लेकर गर्व महसूस कर रहा है। उनके लिए अब 'कूल' होने का मतलब सिर्फ वेस्टर्न कल्चर को फॉलो करना नहीं, बल्कि अपनी परंपराओं को मॉडर्न तरीके से जीना है।
नतीजा साफ है: 2026 में आस्था ही नया ट्रेंड है! अब क्लब की लाइटों से ज्यादा युवाओं को मंदिरों के दीयों और आरती की लौ में सुकून मिल रहा है।
क्या आप भी इस नए साल पर किसी धार्मिक यात्रा पर गए थे? हमें कमेंट्स में जरूर बताएं!









