आज 27 दिसंबर है। बॉलीवुड के 'सुल्तान' और करोड़ों दिलों की धड़कन सलमान खान आज अपना 60वां जन्मदिन मना रहे हैं। बॉक्स ऑफिस पर 'टाइगर' की तरह दहाड़ने वाले सलमान की एक पहचान और है, जो उनके सीने पर लिखे दो शब्दों में बसी है— 'Being Human'।
आज इस खास मौके पर जानते हैं कि कैसे एक विवादित इमेज से निकलकर सलमान ने मानवता की एक ऐसी मिसाल पेश की, जिसने लाखों जिंदगियां बदल दीं।
1. शुरुआत: एक पेंटिंग और नेक इरादा
2000 के दशक की शुरुआत में सलमान खान की छवि एक 'बैड बॉय' की थी, लेकिन उनके गैलेक्सी अपार्टमेंट के बाहर हर सुबह मदद मांगने वालों की कतार लगती थी। सलमान अपनी जेब से चेक काटते थे, लेकिन उन्हें समझ आया कि व्यक्तिगत मदद की एक सीमा है।
- 2007: सलमान ने 'बीइंग ह्यूमन फाउंडेशन' को एक रजिस्टर्ड ट्रस्ट बनाया।
- फंडिंग का अनोखा तरीका: शुरुआत में उनके पास बड़ा फंड नहीं था। सलमान ने अपनी बनाई पेंटिंग्स बेचना शुरू किया और उस पैसे को फाउंडेशन में लगाया। आज भी वह एक बेहतरीन पेंटर हैं और उनकी कला का बड़ा हिस्सा चैरिटी में जाता है।
2. Being Human: सिर्फ फैशन नहीं, एक मिशन
2010 के 'एचडीआईएल इंडिया कपलिंग वीक' में जब सलमान खान बॉलीवुड के बड़े सितारों के साथ 'Being Human' की टी-शर्ट पहनकर रैंप पर उतरे, तो यह एक क्रांति बन गई।
- बिजनेस मॉडल: सलमान ने तय किया कि वह कपड़े बेचेंगे, लेकिन मुनाफा जेब में रखने के बजाय सीधे चैरिटी (स्वास्थ्य और शिक्षा) में डालेंगे।
- खुद करते हैं टेस्ट: सलमान कोई भी कपड़ा स्टोर पर भेजने से पहले खुद हफ्तों तक पहनकर उसकी क्वालिटी चेक करते हैं।
- आंकड़ों की जुबानी
श्रेणी | विवरण |
स्थापना | 2007 (संस्थापक: सलमान खान) |
मुख्य लक्ष्य | स्वास्थ्य सेवा (Healthcare) और शिक्षा (Education) |
बड़ी उपलब्धि | 2000+ बच्चों के दिल का मुफ्त ऑपरेशन (लिटिल हार्ट्स पहल) |
ग्लोबल पहुंच | 15+ देशों में 700 से ज्यादा रिटेल पॉइंट्स |
सामाजिक कार्य | महाराष्ट्र सूखा राहत (2500 पानी टैंकर), मुफ्त आई-कैंप्स, शिक्षा सहायता |
4. फिल्मों का प्रभाव: जब स्क्रीन पर भी दिखा 'मसीहा' रूप
सलमान खान की कुछ फिल्मों ने उनकी 'बीइंग ह्यूमन' वाली छवि को असल जिंदगी में और भी मजबूत किया। इन फिल्मों के जरिए उन्होंने मानवता का संदेश घर-घर पहुंचाया:
- बजरंगी भाईजान: एक गूंगी पाकिस्तानी बच्ची को उसके घर पहुंचाने की कहानी ने सलमान की 'इंसानियत' वाली छवि को वैश्विक स्तर पर चमकाया।
- जय हो: 'तीन लोगों की मदद करो और उनसे कहो कि वे आगे तीन की मदद करें'—यह डायलॉग बीइंग ह्यूमन के दर्शन का हिस्सा बन गया।
- दबंग और किक: इन फिल्मों में उनका 'रॉबिनहुड' वाला अंदाज (गरीबों का मसीहा) लोगों को असल जिंदगी के सलमान से जोड़ने लगा।
5. अनसुने किस्से: विवादों के बीच 'इंसानियत'
- जेल में भी मदद: जब सलमान जोधपुर जेल में थे, तब भी उन्होंने वहां के कैदियों के स्वास्थ्य और जेल की डिस्पेंसरी को सुधारने के लिए आर्थिक मदद की पेशकश की थी।
- फैन क्लब का जज्बा: आज उनके जन्मदिन पर दुनिया भर में फैंस केक काटने के बजाय रक्तदान करते हैं या 'बीइंग ह्यूमन' के बैनर तले गरीबों को खाना खिलाते हैं।
6. भविष्य का विजन: 60 की उम्र में भी जोश बरकरार
आज 60 साल के होने के बाद भी सलमान का मिशन थमा नहीं है। 'बीइंग ह्यूमन' अब ई-साइकिल और फिटनेस कैटेगरी में भी आ चुका है। उनका सपना है कि भारत में कोई भी बच्चा पैसों की कमी के कारण इलाज या पढ़ाई से वंचित न रहे।
निष्कर्ष: इंसान होना ही सबसे बड़ा धर्म है
सलमान खान अक्सर कहते हैं— "इंसान तो सब पैदा होते हैं, लेकिन 'इंसान बनना' (Being Human) एक चॉइस है।" अपनी फिल्मों के जरिए वो भले ही दुश्मनों को धूल चटाते हों, लेकिन असल जिंदगी में वो मौत को मात देने की कोशिश कर रहे हैं।
Happy Birthday Salman Khan! ---








