JHARKHAND: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरुवार को राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया। नामांकन के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी उनके साथ मौजूद रहे। इस घटनाक्रम के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के भीतर भी इस फैसले को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। जानकारी के अनुसार, नामांकन दाखिल करने के बाद जल्द ही जेडीयू विधायक दल की बैठक बुलाई जा सकती है। इस बैठक में आगे की रणनीति और मुख्यमंत्री पद से जुड़े संभावित बदलावों पर चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधायक इस बैठक का इंतजार कर रहे हैं
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले को लेकर जेडीयू के कुछ कार्यकर्ताओं और नेताओं में नाराजगी भी देखी जा रही है। कई कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस तरह का बड़ा फैसला लेने से पहले विधायक दल की बैठक बुलाकर सभी विधायकों की राय ली जानी चाहिए थी। उनका आरोप है कि बिना विधायक दल की औपचारिक बैठक किए ही मुख्यमंत्री को राज्यसभा भेजने का निर्णय लिया गया।
इस मामले पर झारखण्ड कांग्रेस ने नितीश कुमार के प्रति प्रतिक्रिया देते हुए कहा की जो भी नेता बीजेपी के साथ चिपकती है उसे बर्बाद कर देती है। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता सतीश पॉल मुन्जीनि ने कहावत के माध्यम से बताया की "सटले तो गेले बेटा" ठीक इसी प्रकार से कोई भी नेता बीजेपी के साथ जुड़ती है उनकी राजनितिक कैरियर बर्बाद के कगार पर पहुँच जाती है। आने वाले में जदयू का पतन होना तय हो गया है, नितीश कुमार की यह फैसला पार्टी के धरताल से पतन होने का इशारा है।











