प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में देश के एविएशन सेक्टर और बुनियादी ढांचे को लेकर कई ऐतिहासिक निर्णय लिए गए हैं। सरकार ने देश में हवाई कनेक्टिविटी को अभूतपूर्व विस्तार देते हुए 100 नए एयरपोर्ट के निर्माण और 'उड़ान 2.0' योजना को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इस महात्वाकांक्षी परियोजना का प्राथमिक लक्ष्य आम आदमी के लिए हवाई सफर को न केवल सुलभ बनाना है, बल्कि इसे किफायती भी रखना है। इन 100 नए हवाई अड्डों के निर्माण के लिए सरकार ने 12,159 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है, जिसमें प्रति एयरपोर्ट औसतन 100 करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है। खास बात यह है कि इन एयरपोर्ट्स का चयन 'चैलेंज मोड' के जरिए किया जाएगा, यानी जो राज्य या शहर जमीन, सुरक्षा और आवश्यक सुविधाएं सबसे तेजी से उपलब्ध कराएंगे, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी।
हवाई अड्डों के साथ-साथ सरकार ने दुर्गम क्षेत्रों में कनेक्टिविटी सुधारने के लिए 200 नए और आधुनिक हेलीपैड बनाने का भी निर्णय लिया है। मुख्य रूप से पहाड़ों, उत्तर-पूर्वी राज्यों और द्वीपों को ध्यान में रखकर तैयार की गई इस योजना पर 3,661 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकार का मानना है कि जिन स्थानों पर सड़कों का निर्माण कठिन है, वहां हेलीकॉप्टर आवाजाही का सबसे प्रभावी जरिया बनेंगे। इसके अलावा, स्वदेशी विमानन उद्योग को मजबूती देने के लिए भारत में बने विमानों को बढ़ावा दिया जाएगा और नए विमानों की खरीद के लिए 400 करोड़ रुपये का अलग से बजट रखा गया है। 'उड़ान' योजना के व्यापक विस्तार के लिए सरकार ने कुल 28,840 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि तय की है, जिससे छोटे शहरों को हवाई मार्ग से जोड़ने का सपना अब 2036 तक निरंतर जारी रहेगा।
कैबिनेट ने अंतरराष्ट्रीय यात्रियों और सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से IVFRT (इमिग्रेशन, वीजा, फॉरेनर रजिस्ट्रेशन एंड ट्रैकिंग) योजना को भी अगले पांच वर्षों के लिए विस्तार दे दिया है। अब यह योजना 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक लागू रहेगी, जिस पर लगभग 1800 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। इस कदम से भारत की इमिग्रेशन और वीजा प्रणाली पूरी तरह आधुनिक हो जाएगी, जिससे विदेशियों के पंजीकरण और ट्रैकिंग की प्रक्रिया अधिक सुरक्षित और सुव्यवस्थित होगी। इन बुनियादी ढांचों के विकास के साथ-साथ केंद्र सरकार ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। पीएम मोदी के नेतृत्व में 2025 से 2035 तक के लिए नए पर्यावरण लक्ष्यों को मंजूरी दी गई है, ताकि देश के विकास के साथ-साथ प्रकृति को भी सुरक्षित रखा जा सके और प्रदूषण के स्तर में प्रभावी कमी आए।











