रिपोर्ट - उमेश कांत गिरि | घाटशिला, झारखंड
घाटशिला, झारखंड। घाटशिला महाविद्यालय में मंगलवार से दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का भव्य शुभारंभ हुआ। इस सेमिनार में देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिभागी अपने शोध पत्र प्रस्तुत कर रहे हैं, जिससे शैक्षणिक और बौद्धिक वातावरण समृद्ध हो रहा है। कार्यक्रम का उद्घाटन कोल्हान विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. डॉ. अंजिला गुप्ता ने दीप प्रज्वलित कर किया।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. अंजिला गुप्ता ने कहा कि आज के समय में हमें ऐसी शिक्षा की आवश्यकता है जो केवल ज्ञान ही नहीं, बल्कि समृद्धि भी प्रदान करे। उन्होंने कहा कि एक समय था जब विदेशी छात्र भारत में शिक्षा प्राप्त करने के लिए आते थे, लेकिन आज भारतीय छात्र विदेशों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। उन्होंने हमारे प्राचीन वेदों और ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि उनमें व्यापक ज्ञान समाहित है, जिसे पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि विदेशी आक्रमणों और औपनिवेशिक शिक्षा नीतियों ने हमारी पारंपरिक शिक्षा प्रणाली को कमजोर किया, जिससे मौलिक चिंतन बाधित हुआ। नई शिक्षा नीति के माध्यम से अब देश को इन पूर्वाग्रहों से मुक्ति मिल रही है और स्वतंत्र चिंतन को बढ़ावा मिल रहा है।

सेमिनार का विषय “भारत @ 2047 : शिक्षा, संस्कृति और ज्ञान परंपरा का भविष्य” बताते हुए उन्होंने इसे विकसित भारत के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि यह विषय न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि भविष्य के लिए एक सशक्त आधार भी तैयार करता है।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में सोना देवी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. प्रभाकर सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि भारत को अपनी पारंपरिक ज्ञान प्रणाली को आधुनिक विज्ञान और तकनीक के साथ जोड़ना होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत अपनी समृद्ध ज्ञान परंपरा के बल पर वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
शिक्षाविद प्रोफेसर मित्रेश्वर ने भी अपने विचार साझा करते हुए कहा कि भारत की शिक्षा प्रणाली और ज्ञान परंपरा ने हमेशा विश्व को मार्गदर्शन दिया है और आगे भी देती रहेगी।

महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. आर. के. चौधरी ने स्वागत भाषण में कहा कि आने वाले समय में महाविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का भी आयोजन किया जाएगा, जिससे संस्थान की शैक्षणिक पहचान और मजबूत होगी। इस अवसर पर सेमिनार स्मारिका का विमोचन किया गया तथा डॉ. एस. पी. सिंह की पुस्तक “पर्यावरण और भारत की विदेश नीति” का लोकार्पण भी हुआ।
यह सेमिनार गौतम बुद्ध नैतिक शिक्षा मिशन, झारखंड और घाटशिला महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान सेमिनार सचिव एवं मिशन के सचिव डॉ. के. के. मिश्रा को सम्मानित किया गया।
उद्घाटन सत्र में जमशेदपुर वर्कर्स कॉलेज के प्राचार्य डॉ. राजीव कुमार ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन प्रो. इंदल पासवान ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. एस. पी. सिंह ने प्रस्तुत किया।

तकनीकी सत्र में कुल 26 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए, जिनकी अध्यक्षता रांची की डॉ. तमन्ना सिंह, चाईबासा के डॉ. एम. एन. सिंह, डॉ. विनय कुमार सिंह, डॉ. प्रवीण चंचल और डॉ. विनय कुमार गुप्ता ने की। कार्यक्रम के दौरान अतिथियों का पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ स्वागत और सम्मान भी किया गया।
यह सेमिनार शिक्षा, संस्कृति और भारतीय ज्ञान परंपरा के समन्वय के माध्यम से विकसित भारत के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।











