प्रकृति की आराधना का पावन पर्व सरहुल नजदीक आते ही रांची में तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो गई हैं। शहर के विभिन्न सरना स्थलों पर रांची नगर निगम की टीम लगातार निरीक्षण कर रही है, ताकि पर्व के दौरान श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
इसी क्रम में निगम की टीम ने हातमा सरना स्थल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान नगर प्रशासक ने मुख्य पाहन जगलाल पाहन से मुलाकात कर वहां की व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने साफ-सफाई, पेयजल और प्रकाश व्यवस्था को दुरुस्त रखने के निर्देश दिए। साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि सरहुल के दौरान श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

हातमा सरना स्थल का ऐतिहासिक महत्व
हातमा सरना स्थल का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व भी काफी खास माना जाता है। रांची में सरहुल शोभायात्रा की शुरुआत इसी स्थान से हुई थी। बताया जाता है कि वर्ष 1967 में आदिवासी नेता बाबा कार्तिक उरांव ने इस परंपरा की शुरुआत की थी। तब से यह परंपरा हर साल पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है।
हर साल बढ़ता उत्साह
सरहुल पर्व को लेकर आदिवासी समाज में विशेष उत्साह देखने को मिलता है। इस दौरान प्रकृति की पूजा की जाती है और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ शोभायात्राएं निकाली जाती हैं।
प्रशासन और नगर निगम की तैयारियों के चलते इस बार भी रांची में सरहुल पर्व भव्य और व्यवस्थित तरीके से मनाए जाने की उम्मीद है।











