रांची: झारखंड के नक्सली आंदोलन में एक बड़ा अध्याय समाप्त हो गया है। प्रतिबंधित संगठन भाकपा माओवादी के शीर्ष नेता और एक करोड़ रुपये के इनामी प्रशांत बोस उर्फ किशन दा का शुक्रवार सुबह निधन हो गया। वे रांची के बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार (होतवार जेल) में न्यायिक हिरासत में बंद थे। जानकारी के मुताबिक, सुबह करीब 6 बजे उन्हें अचानक सांस लेने में गंभीर तकलीफ होने लगी, जिसके बाद जेल प्रशासन द्वारा उन्हें आनन-फानन में इलाज के लिए रिम्स (RIMS) अस्पताल लाया गया। हालांकि, डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद सुबह 10 बजे उन्होंने दम तोड़ दिया।
75 वर्ष से अधिक उम्र के प्रशांत बोस लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। उनकी गिरफ्तारी भी उनके गिरते स्वास्थ्य के बीच हुई थी। झारखंड पुलिस ने 12 नवंबर 2021 को एक बड़े ऑपरेशन के दौरान प्रशांत बोस को उनकी पत्नी शीला मरांडी के साथ सरायकेला-खरसावां जिले के कांड्रा इलाके से गिरफ्तार किया था। उस समय उनकी गिरफ्तारी को देश में माओवादी नेटवर्क के लिए सबसे बड़ा झटका माना गया था, क्योंकि वे संगठन की केंद्रीय समिति और पोलित ब्योरो के सक्रिय सदस्य होने के साथ-साथ पूर्वी क्षेत्रीय ब्यूरो के सचिव के रूप में पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहे थे।
प्रशांत बोस मूल रूप से पश्चिम बंगाल के रहने वाले थे और उन्हें माओवादी आंदोलन के रणनीतिकारों में गिना जाता था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उन पर देश के अलग-अलग राज्यों में दर्जनों हिंसक वारदातों की योजना बनाने और उन्हें अंजाम देने का आरोप था। उनकी पत्नी शीला मरांडी भी संगठन की केंद्रीय समिति की सदस्य रही हैं। पिछले करीब साढ़े चार सालों से वे लगातार जेल में ही थे और जेल प्रशासन द्वारा समय-समय पर उनके स्वास्थ्य की निगरानी की जा रही थी। उनके निधन के बाद सुरक्षा के दृष्टिकोण से रिम्स परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ा दी गई है।











