रांची: झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL) के उपभोक्ताओं के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 का नया टैरिफ आदेश जारी कर दिया गया है। झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग द्वारा घोषित इस नए आदेश में जहां बिजली की दरों में 6.12 प्रतिशत की औसत बढ़ोतरी की गई है, वहीं मीटर रेंट को पूरी तरह समाप्त कर आम जनता को एक बड़ी राहत भी दी गई है। यह नया टैरिफ आदेश वित्तीय वर्ष 2024-25 के ट्रू-अप और आगामी वर्षों के मल्टी ईयर टैरिफ (MYT) को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
प्रस्तावित 59% के मुकाबले महज 6.12% की वृद्धि
बिजली कंपनी JBVNL ने नियामक आयोग के समक्ष टैरिफ में 59 प्रतिशत की भारी वृद्धि का प्रस्ताव रखा था, लेकिन आयोग ने जनहित और स्टेकहोल्डर्स के सुझावों को प्राथमिकता देते हुए इसे मात्र 6.12 प्रतिशत तक सीमित रखा। दरों में बदलाव की बात करें तो शहरी क्षेत्रों में 55 पैसे और ग्रामीण इलाकों में 50 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अलग-अलग श्रेणियों के आधार पर यह वृद्धि 50 पैसे से लेकर 80 पैसे प्रति यूनिट तक प्रभावी होगी। हालांकि, किसानों के लिए राहत की बात यह है कि कृषि उपभोक्ताओं की बिजली दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
मीटर रेंट खत्म और त्वरित भुगतान पर मिलेगी छूट
इस टैरिफ आदेश का सबसे सकारात्मक पहलू मीटर रेंट का पूरी तरह खात्मा है। अब किसी भी श्रेणी के उपभोक्ता से मासिक बिल में मीटर का किराया नहीं वसूला जाएगा, जिससे उपभोक्ताओं के कुल खर्च में कमी आएगी। इसके अलावा, डिजिटल और समय पर भुगतान को बढ़ावा देने के लिए आयोग ने प्रावधान किया है कि जो उपभोक्ता बिल जेनरेट होने के 5 दिनों के भीतर भुगतान करेंगे, उन्हें बिल राशि पर 2 प्रतिशत की अतिरिक्त छूट दी जाएगी।
प्रीपेड मीटर और ग्रीन एनर्जी को प्रोत्साहन
राज्य में ऊर्जा संरक्षण और आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने के लिए प्रीपेड मीटर धारकों को ऊर्जा शुल्क पर 3 प्रतिशत की विशेष छूट दी जाएगी। साथ ही, प्रीपेड मीटर लगाने के एक महीने के भीतर उपभोक्ताओं की पूरी सिक्योरिटी डिपॉजिट राशि वापस कर दी जाएगी। पर्यावरण अनुकूल पहल के तहत इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) चार्जिंग की दरों को भी संशोधित किया गया है। सौर घंटों के दौरान EV चार्जिंग की दर 7 रुपये प्रति यूनिट और गैर-सौर घंटों में 8.70 रुपये प्रति यूनिट निर्धारित की गई है। ग्रीन एनर्जी अपनाने वाले उपभोक्ताओं के लिए 0.95 रुपये प्रति यूनिट का अतिरिक्त शुल्क तय किया गया है।
सिस्टम में सुधार और पारदर्शिता पर जोर
आयोग ने केवल दरों में बदलाव ही नहीं किया, बल्कि व्यवस्था में जवाबदेही भी तय की है। JBVNL द्वारा प्रस्तावित उच्च वितरण हानि को खारिज करते हुए इसे 13 प्रतिशत पर सीमित कर दिया गया है, ताकि बिजली चोरी और तकनीकी नुकसान पर लगाम लगाई जा सके। उपभोक्ताओं की सुविधाओं के लिए अब हर बिजली बिल पर उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम (CGRF) की जानकारी देना अनिवार्य होगा। साथ ही शिकायतों के त्वरित निपटारे के लिए आयोग ने वर्चुअल सुनवाई के भी निर्देश दिए हैं। कुल मिलाकर, नया टैरिफ आदेश बिजली कंपनी के घाटे को कम करने और उपभोक्ताओं पर बोझ को संतुलित करने का एक प्रयास नजर आता है।











