मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी धर्मपत्नी विधायक कल्पना सोरेन आज आदिवासी कॉलेज छात्रावास परिसर, करमटोली, रांची पहुंचे। उन्होंने प्रकृति पर्व सरहुल के अवसर पर यहां आयोजित महोत्सव में पारंपरिक विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की और समस्त झारखंड वासियों के कल्याण की प्रार्थना की।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि आज उत्साह और हर्षोल्लास का दिन है। आदिवासी समुदाय के लिए यह एक बहुत बड़ा क्षण है। हर वर्ष लोग इस प्रांगण में मिलते रहे हैं और आगे भी मिलते रहेंगे। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार हमारे पूर्वजों ने हमें सरहुल महोत्सव जैसी समृद्ध परंपराओं के निर्वाह की जिम्मेदारी दी है, हम आने वाले समय में अपनी पीढ़ी के कंधों पर इन परंपराओं का निर्वहन सुनिश्चित करेंगे।


मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रकृति से बड़ी पूजा कुछ नहीं है। प्रकृति में ही सभी चीजों का सृजन और विलय होता है। प्रकृति है तो मानव जीवन है। अगर प्रकृति न होती, तो मानव जीवन और संसार में जीव-जंतु की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। यह सभी प्रकृति द्वारा रची और बसाई गई व्यवस्था है और आदिवासी समूह की इस व्यवस्था में अटूट आस्था है।

मौके पर मुख्यमंत्री ने मांदर बजाकर आदिवासी कॉलेज छात्रावास परिसर में आयोजित सरहुल महोत्सव-2026 की खुशियों को दोगुना कर दिया। उन्होंने कहा कि समृद्ध परंपराओं को आगे बढ़ाना हम सभी की जिम्मेदारी है। प्रकृति से जुड़े रहना आवश्यक है, क्योंकि प्रकृति सुरक्षित रहेगी तो हमारा अस्तित्व भी सुरक्षित रहेगा।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आज के भौतिकवादी युग में जीवन व्यस्त और आपा-धापी के बीच चल रहा है, लेकिन हमारे पूर्वजों ने दीर्घकालीन सोच के साथ ऐसी व्यवस्थाएं बनाई हैं, जिनमें लोग एक साथ मंडप या पेड़ के नीचे एकत्रित होकर सामूहिकता का अनुभव करते हैं। इन व्यवस्थाओं को हमें प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने राज्य वासियों को प्रकृति पर्व सरहुल की शुभकामनाएं दी और कहा कि आज के पावन अवसर पर न केवल मानव बल्कि प्रकृति भी झूम रही है। हमें गर्व होना चाहिए कि हम ऐसी व्यवस्था के उपासक हैं, जहां से जीवन शुरू होता है। कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की और विधायक कल्पना सोरेन ने भी झारखंड वासियों को सरहुल महोत्सव की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी।











