बिहार सरकार के वरिष्ठ मंत्री और जेडीयू नेता अशोक चौधरी बुधवार, 25 मार्च 2026 को एक बिल्कुल नए अंदाज में नजर आए। पटना के प्रतिष्ठित एएन कॉलेज में राजनीति के दांव-पेंच समझाने वाले मंत्री जी आज खुद चाक और डस्टर थामे असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर क्लास लेने पहुंचे। उनके लिए यह पल भावुकता और गर्व से भरा था, क्योंकि उन्होंने साल 1991 में इसी कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस में अपनी एमए की पढ़ाई पूरी की थी। करीब 35 साल बाद अपनी ही पुरानी यादों की गलियों में लौटकर छात्रों को पढ़ाना उनके लिए किसी सुखद संयोग से कम नहीं था।
क्लास रूम की दहलीज लांघने से पहले मीडिया से मुखातिब होते हुए अशोक चौधरी ने अपनी उत्सुकता साझा की। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहते हुए मंत्री के पद पर आसीन व्यक्ति के लिए प्रोफेसर बनकर क्लास लेना एक विरल अनुभव है। उन्होंने स्वीकार किया कि 1991 के बाद अब 2026 में दोबारा किताबी राजनीति की दुनिया में कदम रखते हुए उन्हें थोड़ी घबराहट (नर्वसनेस) महसूस हो रही है, लेकिन उन्होंने इसे सीखने-सिखाने की एक प्रक्रिया बताया। मंत्री ने कहा कि राजनीति उनके आसपास का विषय है और अंतरराष्ट्रीय राजनीति को वे हर दिन करीब से देखते और समझते हैं, इसलिए उन्हें विषय को समझाने में ज्यादा कठिनाई नहीं होगी।
जब उनसे सक्रिय राजनीति और राजनीति विज्ञान को पढ़ाने के बीच के अंतर पर सवाल किया गया, तो उन्होंने बड़ी सादगी से जवाब दिया कि ये दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। उनके अनुसार, सदन में सवालों के जवाब देने में वे अब परिपक्व हो चुके हैं, लेकिन छात्रों के मासूम और तीखे सवालों का सामना करना असल चुनौती है। उन्होंने इस पूरे सफर को 'महादेव का आशीर्वाद' करार दिया। उन्होंने याद किया कि कैसे इसी कॉलेज में वे पढ़े, फिर 2015 में शिक्षा मंत्री के रूप में यहां आए और आज एक शिक्षक की भूमिका में हैं। उनके लिए यह एक अद्भुत संयोग है कि जिस संस्थान के विकास में उन्होंने योगदान दिया, वहीं आज उन्हें नई पीढ़ी का भविष्य संवारने का मौका मिला है।










