भागलपुर जिले के नायनागर स्थित रेफरल अस्पताल एक बार फिर विवादों के घेरे में है। ताजा मामला एक महिला डॉक्टर द्वारा मरीज के साथ की गई कथित लापरवाही और दुर्व्यवहार से जुड़ा है, जिसके बाद अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। यह घटना तब सामने आई जब दिग्घी निवासी और होटल मैनेजर दीपक कुमार सड़क दुर्घटना में घायल होने के बाद इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे थे।
पीड़ित दीपक कुमार के अनुसार, बाइक दुर्घटना में उनके बाएं पैर के अंगूठे में गंभीर चोट आई थी। जब वे अस्पताल की ओपीडी में तैनात महिला डॉक्टर के पास पहुंचे, तो उन्होंने जांच के बाद अंगूठे के बजाय घुटने का एक्स-रे लिख दिया। इस चूक का खुलासा तब हुआ जब दीपक एक्स-रे कक्ष पहुंचे और वहां मौजूद ऑपरेटर ने पर्ची देखकर बताया कि चोट अंगूठे में है लेकिन निर्देश घुटने के एक्स-रे के हैं। ऑपरेटर ने उन्हें दोबारा डॉक्टर से पर्ची सुधरवाकर लाने को कहा।
मरीज का आरोप है कि जब वे सुधार के लिए डॉक्टर के पास वापस गए, तो डॉक्टर ने अपनी गलती स्वीकार करने के बजाय उन पर ही तंज कसते हुए कहा, "डॉक्टर हम हैं या आप?" दीपक ने आरोप लगाया कि इसके बाद डॉक्टर ने गार्ड बुलाकर उन्हें जबरन कमरे से बाहर निकलवा दिया। हालांकि, बाद में अस्पताल के अन्य कर्मचारियों के हस्तक्षेप के बाद पर्ची में सुधार किया गया और अंगूठे का एक्स-रे संभव हो सका।
दूसरी ओर, ड्यूटी पर तैनात डॉ. अन्वेषा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने अपनी सफाई में कहा कि पर्ची में हुई गड़बड़ी एक सामान्य मानवीय भूल थी। डॉक्टर का दावा है कि मरीज उन पर चिल्लाने लगा था, जिसके कारण सुरक्षा की दृष्टि से गार्ड को बुलाना पड़ा। उन्होंने किसी भी तरह की बदसलूकी से इनकार करते हुए कहा कि यदि मरीज को कोई समस्या थी, तो उन्हें सीधे अस्पताल प्रबंधन या प्रभारी अधिकारी से शिकायत करनी चाहिए थी।
उल्लेखनीय है कि नायनागर रेफरल अस्पताल का विवादों से पुराना नाता रहा है। इससे पहले सरस्वती पूजा के दौरान करंट से झुलसे युवकों को डॉक्टर न होने के कारण बिना इलाज लौटना पड़ा था, जिस पर सिविल सर्जन ने संज्ञान भी लिया था। वहीं, फरवरी 2025 में भी एक घायल मरीज को स्ट्रेचर तक नसीब नहीं हुआ था और परिजन उसे उठाकर अंदर ले गए थे। फिलहाल, पीड़ित दीपक कुमार ने इस मामले में संबंधित डॉक्टर और प्रशासन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।










