भारतीय शेयर बाजार के निवेशकों के लिए अप्रैल का महीना काफी हलचल भरा रहने वाला है। देश की दिग्गज आईटी कंपनियाँ अपने वित्तीय वर्ष 2026 की चौथी तिमाही (Q4) के नतीजों की घोषणा करने के लिए तैयार हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इन नतीजों के साथ कंपनियों द्वारा दिए जाने वाले डिविडेंड के कारण आईटी शेयरों में जबरदस्त तेजी देखने को मिल सकती है, जिससे निवेशकों के पास कमाई का बेहतरीन मौका होगा।
TCS और Wipro से होगी शुरुआत कमाई के इस सीजन में सबसे ज्यादा फोकस टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) पर रहेगा, जो 9 अप्रैल को अपने FY26 और Q4 के नतीजे जारी करेगी। इसी दिन कंपनी अपने फाइनल डिविडेंड की सिफारिश भी कर सकती है। गौरतलब है कि TCS पहले ही फरवरी में ₹46 का स्पेशल डिविडेंड और शुरुआती तीन तिमाहियों में कुल ₹33 का इंटरिम डिविडेंड देकर निवेशकों को खुश कर चुकी है। इसके ठीक बाद, 16 अप्रैल को विप्रो (Wipro) अपने नतीजे पेश करेगी। विप्रो की घोषणा बाजार बंद होने के बाद होगी। हालाँकि कंपनी ने अभी नए डिविडेंड का ऐलान नहीं किया है, लेकिन इस वित्त वर्ष में वह अब तक ₹11 प्रति शेयर का इंटरिम डिविडेंड दे चुकी है।
HCL Tech और Persistent Systems की नजरें AI पर महीने के उत्तरार्ध में, यानी 21 अप्रैल को HCL Tech और Persistent Systems दोनों अपने वित्तीय परिणामों की घोषणा करेंगे। HCL Tech नतीजों के साथ-साथ इंटरिम डिविडेंड पर भी विचार करेगी। कंपनी के सीईओ पहले ही कह चुके हैं कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के कारण आईटी इंडस्ट्री में बड़े बदलाव आ रहे हैं, जिस पर निवेशकों की पैनी नजर रहेगी। इसी दिन Persistent Systems भी अपने नतीजों के साथ वित्त वर्ष 2026 के लिए फाइनल डिविडेंड की सिफारिश कर सकती है, जिसने पिछली तिमाही में ₹22 प्रति शेयर का डिविडेंड दिया था।
Infosys के नतीजों पर रहेगी सबकी नजर आईटी सेक्टर की एक और बड़ी दिग्गज, इंफोसिस (Infosys), 23 अप्रैल को अपने नतीजों के साथ सामने आएगी। कंपनी द्वारा इस दौरान वित्त वर्ष 2026 के लिए फाइनल डिविडेंड का ऐलान किए जाने की पूरी संभावना है। इंफोसिस की परंपरा आमतौर पर एक इंटरिम और एक फाइनल डिविडेंड देने की रही है, और इससे पहले नवंबर में कंपनी ₹23 प्रति शेयर का भुगतान कर चुकी है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
आईटी कंपनियों के ये नतीजे न केवल मुनाफे का आंकड़ा पेश करेंगे, बल्कि भविष्य की दिशा भी तय करेंगे। इस बार निवेशकों और विश्लेषकों का ध्यान मुख्य रूप से कंपनियों की 'ऑर्डर बुक' (नया काम मिलने की रफ्तार) और 'एट्रिशन रेट' (कर्मचारियों के कंपनी छोड़ने की दर) पर रहेगा। विशेष रूप से एआई के बढ़ते प्रभाव के बीच यह देखना दिलचस्प होगा कि कंपनियां खुद को नई तकनीक के अनुसार कैसे ढाल रही हैं और उनके मार्जिन पर इसका क्या असर पड़ रहा है।









