राँची, 12 फरवरी 2026: राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने आज लोक भवन, राँची में आयोजित कश्मीरी युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम 2025-26 के अंतर्गत “वतन को जानो” कार्यक्रम में जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग, कुपवाड़ा, बारामुल्ला, बडगाम, श्रीनगर एवं पुलवामा जिलों से आए प्रतिभागियों को संबोधित किया।
राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि भारत विविधताओं का देश है, पर हमारी आत्मा एक है। भाषा, वेशभूषा और परंपराओं की भिन्नता के बावजूद राष्ट्रीय एकता हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने बताया कि इस प्रकार के कार्यक्रम आपसी संवाद, विश्वास और समझ को प्रगाढ़ करते हैं और भावनात्मक एकता को सुदृढ़ बनाते हैं।
उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी के शब्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि “कश्मीर भारत का किरीट है,” और उसकी सांस्कृतिक समृद्धि, प्राकृतिक भव्यता एवं आध्यात्मिक चेतना राष्ट्र की पहचान है। राज्यपाल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर अपनी अनुपम प्राकृतिक सुंदरता और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के कारण ‘पृथ्वी का स्वर्ग’ कहलाता है।

राज्यपाल महोदय ने कहा कि भारत ने सदैव शांति, संयम और संवाद का मार्ग अपनाया है। “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना हमारी संस्कृति का मूल है। उन्होंने यह भी कहा कि समय-समय पर पड़ोसी राष्ट्र द्वारा अशांति फैलाने के प्रयास हुए हैं, लेकिन राष्ट्र की संप्रभुता और अखंडता को चुनौती देने पर भारत ने मुंहतोड़ जवाब दिया है।
उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे शिक्षा, कौशल, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति को अपने जीवन का आधार बनाएं और ‘विकसित भारत@2047’ के संकल्प को साकार करने में सक्रिय भूमिका निभाएँ। राज्यपाल ने झारखण्ड की समृद्ध जनजातीय परंपराओं और प्रकृति-आधारित पर्वों जैसे सरहुल, करमा और सोहराय का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य की सांस्कृतिक विविधता और युवा ऊर्जा इसे विशेष पहचान देती है।

कार्यक्रम में राज्यपाल ने लोक भवन, राँची उद्यान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यहाँ 100 से अधिक प्रजातियों के गुलाब सहित अनेक दुर्लभ वृक्ष और पौधे हैं, जो आकर्षण का केंद्र हैं। उद्यान अब आम नागरिकों के लिए खोला गया है और अब तक पाँच लाख से अधिक लोग इसे देख चुके हैं। उन्होंने युवाओं से लोक भवन उद्यान का अवलोकन करने की भी अपील की।











