आम आदमी पार्टी के भीतर मचे घमासान और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को डिप्टी लीडर के पद से हटाए जाने के बाद दिल्ली की सियासत में हलचल तेज हो गई है। इस फैसले पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए राघव चड्ढा ने एक वीडियो संदेश के जरिए सीधे पार्टी नेतृत्व पर सवाल दागे हैं। उन्होंने भावुक और तल्ख लहजे में कहा कि संसद में उन्हें जब भी बोलने का अवसर मिला, उन्होंने हमेशा जनता से जुड़े उन बुनियादी मुद्दों को उठाया जिन्हें अक्सर सदन में नजरअंदाज कर दिया जाता है। चड्ढा ने सवाल उठाया कि क्या आम आदमी की आवाज बुलंद करना कोई गुनाह है? उन्होंने हैरानी जताते हुए पूछा कि उनकी स्पीच से देश के आम नागरिकों को तो लाभ हो रहा था, लेकिन इससे आम आदमी पार्टी को क्या नुकसान हो रहा था कि पार्लियामेंट सेक्रेटेरिएट के जरिए उनके बोलने पर ही रोक लगवा दी गई।
राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक और विस्तृत वीडियो साझा किया है, जिसमें उन्होंने संसद में अपने अब तक के कार्यकाल का रिपोर्ट कार्ड पेश किया है। इस वीडियो में उन तमाम भाषणों और मुद्दों का संकलन है, जिनमें उन्होंने टैक्स का बढ़ता बोझ, मोबाइल डेटा की कीमतें, पैटर्निटी लीव की जरूरत, बैंकों द्वारा वसूले जाने वाले अतिरिक्त चार्ज, खाने में मिलावट और इनकमिंग कॉल बंद होने जैसी समस्याओं पर सरकार का ध्यान खींचा था। इतना ही नहीं, उन्होंने 28 दिन के रिचार्ज की वैधता, एयरपोर्ट पर यात्रियों के साथ होने वाली असुविधा, पेपर लीक, वायु प्रदूषण, हेल्थ इंश्योरेंस और किसानों के संकट जैसे विषयों पर भी पुरजोर तरीके से अपनी बात रखी थी।
राजनीतिक गलियारों में राघव चड्ढा के इस रुख के कई मायने निकाले जा रहे हैं। जानकारों का मानना है कि अपनी ही पार्टी के खिलाफ इस तरह के सार्वजनिक सवाल उठाना चड्ढा की गहरी नाराजगी को दर्शाता है। हालांकि, अभी तक न तो आम आदमी पार्टी की ओर से इस पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण आया है और न ही राघव चड्ढा ने भविष्य की किसी योजना का संकेत दिया है, लेकिन जिस तरह से उन्होंने पार्टी नेतृत्व को कटघरे में खड़ा किया है, उससे यह स्पष्ट है कि 'आप' के अंदरूनी हालात सामान्य नहीं हैं। विश्लेषकों का कहना है कि डिप्टी लीडर के पद से हटाए जाना और फिर सांसद द्वारा इस तरह की तीखी प्रतिक्रिया देना दिल्ली की राजनीति में किसी बड़े फेरबदल की आहट हो सकती है।











