उत्तर प्रदेश के मथुरा में ‘गो रक्षक’ चंद्रशेखर उर्फ ‘फरसा वाले बाबा’ की मौत के बाद इलाके में भारी तनाव है। इस घटना के बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने राज्य सरकार और पुलिस-प्रशासन पर तीखा हमला किया।
अखिलेश यादव ने कहा कि प्रदेश में लगातार अपराध और हिंसा बढ़ रही है। उन्होंने मथुरा में हुई हत्या के साथ-साथ पहले वाराणसी और गोरखपुर में हुई घटनाओं का भी जिक्र करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह असफल है। सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि पुलिस अपने काम में निष्क्रिय है और केवल भाजपा के काम कर रही है, जबकि महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा रही।
उन्होंने आगे कहा कि अगर पुलिस अपना काम सही तरीके से करे और केवल राजनीतिक दबाव में काम न करे, तो भाजपा की सरकार भी कमजोर पड़ जाएगी। साथ ही, अखिलेश यादव ने रोजमर्रा की जरूरतों के संदर्भ में कहा कि LPG अब ‘लापता गैस’ बन गई है, इसलिए लोगों को कोयला, लकड़ी, स्टोव और इंडक्शन स्टोव का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।
फरसा वाले बाबा कौन थे?
मथुरा के फरसा वाले बाबा का असली नाम चंद्रशेखर था। वे बरसाना के आजनौख गांव में गौशाला चलाने वाले प्रसिद्ध गो रक्षक थे। ब्रज क्षेत्र में उनका नाम निडर और सक्रिय गौ रक्षक के रूप में जाना जाता था। हाथ में हमेशा फरसा लेकर गौ-वंश की रक्षा करने वाले चंद्रशेखर ब्रज क्षेत्र में काफी लोकप्रिय थे और गौरक्षा आंदोलन के प्रमुख चेहरा माने जाते थे।
मौत की घटना
शनिवार 21 मार्च 2026 की सुबह, फरसा वाले बाबा बाइक से गो तस्करों का पीछा कर रहे थे, तभी कोटवन चौकी के नवीपुर इलाके में उन्हें एक वाहन ने कुचल दिया। इस हादसे में फरसा वाले बाबा की मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने इसे एक्सीडेंट बताया है, लेकिन स्थानीय लोग इसे गोवंश तस्करी से जोड़कर देख रहे हैं। घटना में एक आरोपी को पकड़ लिया गया है, जबकि तीन अन्य आरोपी फरार हैं।
मथुरा में फरसा वाले बाबा की मौत ने समाज में गहरी चिंता और पुलिस पर सवाल उठाने की स्थिति पैदा कर दी है। इस घटना के बाद सियासी बयानों और कानून व्यवस्था पर बहस तेज हो गई है।











