उत्तर प्रदेश कैडर के आईएएस (IAS) अधिकारी रिंकू सिंह राही इन दिनों देश भर में चर्चा का विषय बने हुए हैं। अपनी ईमानदारी और अटूट साहस के लिए पहचाने जाने वाले राही ने हाल ही में अपने पद से इस्तीफा देकर प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। उनका आरोप है कि सिस्टम में ईमानदार अधिकारियों को "बिना पोस्टिंग के वेतन" देकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग और 7 गोलियों का दर्द
रिंकू सिंह राही की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। साल 2004 में उन्होंने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) की परीक्षा पास की और PCS अधिकारी बने। साल 2008 में मुजफ्फरनगर में जिला समाज कल्याण अधिकारी के पद पर रहते हुए उन्होंने छात्रवृत्ति और पेंशन योजनाओं में हो रहे करोड़ों के भ्रष्टाचार का खुलासा किया।
इस ईमानदारी की कीमत उन्हें भारी चुकानी पड़ी। मार्च 2009 में उन पर जानलेवा हमला हुआ, जिसमें उन्हें 7 गोलियां लगीं। दो गोलियां उनके चेहरे पर लगीं, जिससे उनका जबड़ा क्षतिग्रस्त हो गया और एक आंख की रोशनी हमेशा के लिए चली गई। महीनों तक अस्पताल में मौत से लड़ने के बाद वह वापस लौटे, लेकिन उनका जज्बा कम नहीं हुआ।
16 प्रयासों का संघर्ष: हार न मानने की मिसाल
तमाम शारीरिक कष्टों और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच राही ने देश की सबसे कठिन परीक्षा UPSC की तैयारी जारी रखी।
- साल 2021: उन्होंने दिव्यांग कोटे से 683वीं रैंक हासिल की, लेकिन प्रेफरेंस के तकनीकी कारणों से उन्हें कोई सेवा अलॉट नहीं हुई।
- साल 2022: उन्होंने हार नहीं मानी और 16वें प्रयास में 921वीं रैंक के साथ फिर से परीक्षा पास की। इस बार उन्हें उनका होम कैडर (उत्तर प्रदेश) और आईएएस पद मिला।
UPSC परीक्षा के अंकों का विवरण:
दिलचस्प बात यह है कि दोनों ही बार उन्हें इंटरव्यू में काफी कम अंक मिले, लेकिन मेंस (Mains) के प्रदर्शन ने उन्हें सफल बनाया।
परीक्षा वर्ष | मुख्य परीक्षा (Mains) | साक्षात्कार (Interview) | कुल परिणाम |
UPSC 2021 | 591 / 1750 | 110 / 275 | 683वीं रैंक (सेवा नहीं मिली) |
UPSC 2022 | 654 / 1750 | 105 / 275 | 921वीं रैंक (IAS अलॉटेड) |
इस्तीफे की वजह: 'सिस्टम की सजा'
आईएएस बनने के बाद भी राही की राह आसान नहीं रही। उन्होंने अपने इस्तीफे में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सिस्टम में ईमानदार लोगों को अलग तरह से सजा दी जाती है। उन्हें लंबे समय तक कोई जिम्मेदारी या पोस्टिंग नहीं दी गई, जिसे उन्होंने 'सैलरी देकर घर बिठाना' करार दिया।
"सिस्टम में काम करने वालों को नहीं, बल्कि चुप रहने वालों को जगह मिलती है।" - रिंकू सिंह राही
तकनीकी पेंच: क्या वापस बन पाएंगे PCS?
रिंकू राही ने इस्तीफे के साथ मांग की थी कि उन्हें वापस पीसीएस (PCS) कैडर में भेज दिया जाए। हालांकि, प्रशासनिक जानकारों के अनुसार यह तकनीकी रूप से संभव नहीं है। आईएएस बनने के लिए उन्होंने अपने पिछले पीसीएस पद से औपचारिक रूप से इस्तीफा दे दिया था, और सेवा नियमों के तहत पदोन्नति या सेवा परिवर्तन के बाद पुराने पद पर वापसी का प्रावधान नहीं है।
रिंकू सिंह राही का इस्तीफा न केवल एक अधिकारी का व्यक्तिगत फैसला है, बल्कि यह प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और ईमानदारी के सामने खड़ी चुनौतियों पर एक बड़ा सवालिया निशान भी है।











