नई दिल्ली: दिल्ली सरकार ने निजी गैर-सरकारी मान्यता प्राप्त स्कूलों की मनमानी पर लगाम कसने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। शिक्षा निदेशालय द्वारा बुधवार को जारी इस आदेश में स्पष्ट किया गया है कि कोई भी स्कूल अब विद्यार्थियों या उनके अभिभावकों को किसी खास दुकान से किताबें, कॉपियां या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकेगा। सरकार ने इस बात पर जोर दिया है कि परिवारों के पास इन आवश्यक वस्तुओं को खरीदने के लिए बाजार में अपनी पसंद की स्वतंत्रता होनी चाहिए।
यह कदम दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम और नियम (डीएसईएआर) 1973 तथा दिल्ली बाल शिक्षा का अधिकार नियम 2011 के प्रावधानों के तहत उठाया गया है। दरअसल, सरकार को लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही थीं कि कई निजी स्कूल अभिभावकों को निर्धारित विक्रेताओं से ही महंगा सामान खरीदने के लिए बाध्य कर रहे हैं। शिक्षा निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि चूंकि निजी स्कूल धर्मार्थ संस्थाओं के रूप में कार्य करते हैं, इसलिए शिक्षा के व्यवसायीकरण या अभिभावकों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालने वाली किसी भी गतिविधि को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
नए नियमों के अनुसार, स्कूलों को अब पुस्तकों, लेखन सामग्री और वर्दी की पूरी सूची पारदर्शी तरीके से सार्वजनिक करनी होगी। स्कूलों को अपनी वेबसाइट, नोटिस बोर्ड और परिसर के भीतर इन सामग्रियों की विस्तृत सूची प्रदर्शित करनी होगी। इसके अलावा, स्कूलों को कम से कम पांच ऐसी दुकानों के नाम भी बताने होंगे जहां यह सामान उपलब्ध हो, ताकि अभिभावकों के पास खरीदारी के विकल्प मौजूद रहें। सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि स्कूल की ड्रेस में तीन साल से पहले कोई बदलाव नहीं किया जा सकेगा और अगर छात्र बाजार से मिलता-जुलता सामान खरीदते हैं, तो स्कूल को उसे स्वीकार करना होगा।
नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ सरकार ने सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है। यदि कोई स्कूल अभिभावकों पर किसी विशेष सप्लायर से सामान लेने का दबाव बनाता है, तो उसकी शिकायत सीधे नोडल अधिकारी से की जा सकती है। इसके लिए सरकार ने हेल्पलाइन नंबर 9818154069 और ईमेल आईडी ddeac1@gmail.com जारी की है, जिस पर अभिभावक अपनी समस्या दर्ज करा सकते हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य शिक्षा के क्षेत्र में पारदर्शिता लाना और अभिभावकों को स्कूलों के अनुचित दबाव से मुक्त करना है।











