नई दिल्ली: संसद के दोनों सदनों में शुक्रवार को कार्यवाही शुरू होते ही जोरदार हंगामा देखने को मिला। विपक्ष पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध और देश में कथित एलपीजी संकट के मुद्दे पर चर्चा की मांग कर रहा है। लगातार हो रहे हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
इसी बीच विपक्ष ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी तेज कर दी है। सूत्रों के मुताबिक इस प्रस्ताव के नोटिस पर अब तक लोकसभा और राज्यसभा मिलाकर 193 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर कर दिए हैं।
CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए विपक्ष का प्रस्ताव
सूत्रों के अनुसार इस प्रस्ताव से जुड़े नोटिस पर लोकसभा के 130 और राज्यसभा के 63 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। यह नोटिस शुक्रवार को संसद के कम से कम एक सदन में पेश किया जा सकता है। हालांकि यह अभी स्पष्ट नहीं है कि इसे पहले लोकसभा में पेश किया जाएगा या राज्यसभा में।
एक वरिष्ठ विपक्षी नेता ने बताया कि सांसदों में इस नोटिस पर हस्ताक्षर करने को लेकर काफी उत्साह देखा गया। कई सांसद गुरुवार को भी आगे आए और हस्ताक्षर किए, जबकि आवश्यक संख्या पहले ही पूरी हो चुकी थी।
CEC को हटाने के क्या हैं नियम
नियमों के अनुसार मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पद से हटाने के लिए संसद में विशेष प्रक्रिया अपनाई जाती है।
- लोकसभा में कम से कम 100 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं
- राज्यसभा में कम से कम 50 सांसदों के हस्ताक्षर होने चाहिए
इस बार नोटिस पर इंडिया ब्लॉक के लगभग सभी दलों के सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। इसमें आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद भी शामिल बताए जा रहे हैं, भले ही पार्टी अब आधिकारिक रूप से विपक्षी गठबंधन का हिस्सा नहीं है।
CEC पर लगाए गए सात आरोप
विपक्षी दलों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। नोटिस में कुल सात आरोप शामिल किए गए हैं, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- कार्यालय में पक्षपाती और भेदभावपूर्ण आचरण
- चुनावी धांधली की जांच में जानबूझकर बाधा डालना
- बड़े पैमाने पर मतदाताओं को मतदान से वंचित करना
- चुनाव प्रक्रिया में निष्पक्षता पर सवाल
विपक्ष का आरोप है कि ज्ञानेश कुमार ने कई मौकों पर सत्तारूढ़ दल भाजपा को फायदा पहुंचाने वाले फैसले लिए, खासकर इलेक्टोरल रोल्स के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान।
इतिहास में पहली बार CEC के खिलाफ हटाने का नोटिस
बताया जा रहा है कि भारतीय संसदीय इतिहास में पहली बार किसी मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने के लिए ऐसा नोटिस लाया जा रहा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संसद में इस मुद्दे पर आगे क्या राजनीतिक घटनाक्रम सामने आता है।











