बॉलीवुड के मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान आज अपनी शानदार और चुनिंदा फिल्मों के लिए जाने जाते हैं। वे साल भर में भले ही कम फिल्में करें, लेकिन उनका हर प्रोजेक्ट बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रचने का दम रखता है। हालांकि, आमिर के करियर का एक ऐसा पन्ना भी है जो कभी पूरा ही नहीं हो सका। हम बात कर रहे हैं 34 साल पहले शुरू हुई फिल्म 'टाइम मशीन' की, जो बनकर भी कभी सिनेमाघरों के पर्दे तक नहीं पहुंच पाई।
साल 1992 में शुरू हुई इस फिल्म का निर्देशन मशहूर डायरेक्टर शेखर कपूर कर रहे थे। उस दौर में जब हिंदी सिनेमा में साइंस-फिक्शन (Sci-Fi) का नामो-निशान बहुत कम था, तब 'टाइम मशीन' जैसा प्रोजेक्ट अपने समय से काफी आगे माना जा रहा था। फिल्म की कहानी टाइम ट्रैवल पर आधारित थी, जिसमें आमिर खान एक ऐसा किरदार निभाने वाले थे जो एक वैज्ञानिक की मदद से समय के सफर पर निकलता है और पीछे जाकर अपने माता-पिता से मिलता है। बताया जाता है कि यह कॉन्सेप्ट मशहूर हॉलीवुड फिल्म 'बैक टू द फ्यूचर' से प्रेरित था, जिसे पूरी तरह भारतीय रंग-ढंग में पेश करने की तैयारी थी।
इस बड़े बजट के प्रोजेक्ट में आमिर खान के साथ रेखा, नसीरुद्दीन शाह और रवीना टंडन जैसे दिग्गज कलाकार शामिल थे। फिल्म को लेकर दर्शकों और इंडस्ट्री में भारी उत्साह था और इसकी शूटिंग भी काफी हद तक पूरी हो चुकी थी। रिपोर्ट्स की मानें तो फिल्म का लगभग 75 से 80 प्रतिशत हिस्सा शूट हो चुका था और करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए जा चुके थे। लेकिन, इसी दौरान फिल्म के सामने वित्तीय संकट (Financial Issues) खड़ा हो गया।
फिल्म की लागत लगातार बढ़ती जा रही थी, जिसे देख प्रोड्यूसर ने अपने हाथ पीछे खींच लिए। स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि फिल्म को बंद होने से बचाने के लिए आमिर खान ने अपनी फीस तक की कुर्बानी दे दी थी, लेकिन फिर भी बात नहीं बनी। इसी बीच एक और बड़ा झटका तब लगा जब डायरेक्टर शेखर कपूर प्रोजेक्ट को अधूरा छोड़कर अमेरिका चले गए। उनके जाने के बाद यह फिल्म पूरी तरह से अधर में लटक गई।
बाद के वर्षों में इस अधूरी कहानी को दोबारा जिंदा करने की कोशिशें भी हुईं। साल 2008 के आसपास चर्चा थी कि शेखर कपूर इसे नई स्टारकास्ट के साथ दोबारा शुरू करना चाहते हैं, जिसमें रणबीर कपूर का नाम भी सामने आया था। हालांकि, तमाम कोशिशों के बावजूद यह योजना कभी हकीकत में नहीं बदल सकी और आमिर खान की यह महात्वाकांक्षी फिल्म आज भी बॉलीवुड के इतिहास में एक अनसुलझी पहेली बनकर रह गई है।











