RANCHI: रांची के ठाकुरगांव-बुढ़मू क्षेत्र में बिना पॉल्यूशन सर्टिफिकेट के धड़ल्ले से चल रहे अवैध ईंट भट्ठों पर सख्त कानूनी कार्रवाई और इन्हें तुरंत बंद करने का प्रावधान है। नियमों के अनुसार, झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (JSPCB) की अनापत्ति (NOC), पर्यावरण स्वच्छता प्रमाण पत्र (EC) और जिला खनन विभाग की अनुमति के बिना किसी भी भट्ठे का संचालन पूरी तरह से गैर-कानूनी है। इसके बावजूद कार्रवाई में ढिलाई के पीछे प्रशासनिक समन्वय की कमी और स्थानीय स्तर पर नियमों की अनदेखी मुख्य कारण माने जाते हैं।नियम क्या कहते हैं?
अनिवार्य लाइसेंस
भट्ठा चलाने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से CTE (Consent to Establish) और CTO (Consent to Operate) लेना कानूनी रूप से आवश्यक है।
दूरी के मानक:
रिहाइशी इलाकों, स्कूलों, अस्पतालों और जंगलों से ईंट भट्ठों की एक निश्चित न्यूनतम दूरी (कम से कम 800 मीटर से 1 किलोमीटर) होनी चाहिए।
रॉयल्टी और पेनाल्टी:
भट्ठा संचालकों को मिट्टी के उपयोग के बदले जिला खनिज स्थापना ट्रस्ट (DMFT) और खनन विभाग में रॉयल्टी जमा करनी होती है।आखिर कार्रवाई क्यों नहीं होती?
विभागीय समन्वय की कमी:
ईंट भट्ठों पर कार्रवाई के लिए खनन विभाग, प्रदूषण बोर्ड, राजस्व विभाग और स्थानीय पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम की आवश्यकता होती है। अक्सर विभागों के बीच तालमेल की कमी का फायदा भट्ठा संचालक उठाते हैं।
सख्त निगरानी का अभाव:
ठाकुरगांव और बुढ़मू जैसे ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा नियमित औचक निरीक्षण नहीं होने से अवैध कारोबार फलता-फूलता है। जिला खनन कार्यालयों और क्षेत्रीय प्रदूषण बोर्ड कार्यालयों के पास पर्याप्त कार्यबल न होने के कारण सभी अवैध स्थलों पर एक साथ कार्रवाई करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। जहरीले धुएं और धूल के कणों से स्थानीय ग्रामीणों में सांस की बीमारी, टीबी, आंखों में जलन और फेफड़ों के संक्रमण का खतरा बढ़ रहा है। भट्ठा संचालक खेतों की उपजाऊ ऊपरी मिट्टी को अवैध रूप से निकाल लेते हैं, जिससे उपजाऊ जमीन बंजर हो रही है। नागरिक इस पर क्या कदम उठा सकते हैं?








