दुमका - संताली भाषा की लिपि ओलचिकी के 100 वर्ष पूर्ण होने तथा इसके आविष्कारक पंडित रघुनाथ मुर्मू के सम्मान में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में डाक टिकट एवं 100 रुपये का स्मारक सिक्का जारी किया। जारी किए गए डाक टिकट और 100 रुपये के स्मारक सिक्के पर पंडित रघुनाथ मुर्मू का चित्र तथा ओलचिकी लिपि के अक्षर अंकित हैं। अखड़ा एवं ग्रामीणों ने इस ऐतिहासिक पहल के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के प्रति आभार व्यक्त किया।
ज्ञातव्य है कि ओलचिकी लिपि का आविष्कार पंडित रघुनाथ मुर्मू ने वर्ष 1925 में किया था। यह संताली भाषा की आधिकारिक लेखन प्रणाली है। संताली भारत की मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय भाषाओं में शामिल एक प्रमुख जनजातीय (आग्नेय) भाषा है। यह मुख्य रूप से झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम और बिहार में व्यापक रूप से बोली जाती है। इसके अतिरिक्त नेपाल और बांग्लादेश आदि देशों में भी बोली जाती है। इस ऐतिहासिक पहल से संताल समाज में गौरव और उत्साह का वातावरण है। इस अवसर पर दिसोम मरांग बुरु युग जाहेरे अखड़ा द्वारा दुमका प्रखंड के लेटो गांव स्थित मांझी थान में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। इस दौरान ग्रामीणों के बीच प्रसाद एवं मिठाइयों का भी वितरण किया गया।











