रांची: झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने आज भगवान बिरसा मुंडा संग्रहालय (पुराना जेल परिसर) में आयोजित एक भव्य समारोह में 'वीर बिरसा मुंडा साइक्लोथॉन' के दूसरे चरण को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित यह यात्रा रांची से शुरू होकर लगभग 1300 किलोमीटर की दूरी तय करेगी और देश की राजधानी नई दिल्ली पहुँचेगी।
राष्ट्रभक्ति और युवा शक्ति का प्रतीक: राज्यपाल
समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि यह साइक्लोथॉन केवल एक खेल गतिविधि नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रभक्ति, साहस और जनजातीय गौरव का एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने एनसीसी (NCC) बिहार-झारखंड निदेशालय के अधिकारियों और विशेष रूप से कैडेट्स की सराहना की।
"आज का युवा केवल भविष्य का कर्णधार नहीं, बल्कि वर्तमान का सबसे मजबूत आधार है। यह यात्रा स्वतंत्रता संग्राम में झारखंड के अतुलनीय योगदान की गाथा पूरे राष्ट्र तक ले जाएगी।" — संतोष कुमार गंगवार, राज्यपाल
भगवान बिरसा मुंडा को श्रद्धांजलि
कार्यक्रम की शुरुआत में राज्यपाल ने संग्रहालय में स्थित भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा केवल जनजातीय समाज के नायक नहीं, बल्कि अन्याय और शोषण के विरुद्ध भारतीय स्वाभिमान के प्रतीक थे। प्रधानमंत्री द्वारा उनकी जयंती को 'जनजातीय गौरव दिवस' के रूप में मनाए जाने के निर्णय ने उनके संघर्ष को वैश्विक पहचान दी है।
NCC और 'राष्ट्र प्रथम' की भावना
अपने संबोधन के दौरान राज्यपाल ने अपने व्यक्तिगत अनुभव भी साझा किए। उन्होंने बताया कि वे स्वयं एक NCC कैडेट रहे हैं और सैन्य सेवा में जाना चाहते थे, लेकिन आपातकाल (Emergency) के दौरान जेल जाने और उसके बाद सक्रिय राजनीति में आने के कारण उनका रास्ता बदल गया। उन्होंने कैडेट्स को सिखाया कि NCC अनुशासन, नेतृत्व और 'राष्ट्र प्रथम' की भावना विकसित करने का सबसे अच्छा मंच है।
साइक्लोथॉन यात्रा की मुख्य विशेषताएं:
- प्रारंभ: रांची (बिरसा मुंडा संग्रहालय)।
- गंतव्य: नई दिल्ली।
- कुल दूरी: लगभग 1300 किलोमीटर।
- सहभागी: NCC बिहार और झारखंड निदेशालय के कैडेट्स।
- उद्देश्य: जनजातीय गौरव, साहस और सामाजिक न्याय के आदर्शों का प्रचार करना।
समारोह के दौरान विभिन्न स्कूलों के एनसीसी कैडेट्स द्वारा मनमोहक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए, जिन्होंने झारखंड की समृद्ध संस्कृति और कला की झलक पेश की। अंत में राज्यपाल ने सभी सहभागी कैडेट्स को उनके उज्ज्वल भविष्य और सफल यात्रा के लिए शुभकामनाएं दीं।










