नई दिल्ली:
उन्नाव रेप केस एक बार फिर देश की सियासत और न्याय व्यवस्था के केंद्र में आ गया है। मामले के दोषी कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद पीड़िता और उसका परिवार गहरे डर और असुरक्षा में है। जमानत के फैसले के बाद से ही देशभर में आक्रोश देखने को मिल रहा है।
इंडिया गेट पर पीड़िता की मां का धरना
दोषी को जमानत मिलने के विरोध में पीड़िता की मां ने इंडिया गेट पर धरना प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि सेंगर के बाहर आने से पूरे परिवार की जान को गंभीर खतरा है। पीड़िता का परिवार लगातार न्याय की गुहार लगा रहा है।
राहुल गांधी से मुलाकात, न्याय का मिला आश्वासन
इसी बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने उन्नाव रेप पीड़िता से मुलाकात की। इस दौरान पीड़िता की मां और दो बहनें भी मौजूद थीं। बाद में सोनिया गांधी ने भी पीड़िता और उसके परिवार से बातचीत की। सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भ्याना भी इस मुलाकात में शामिल रहीं।
मुलाकात के बाद पीड़िता ने क्या कहा?
पीड़िता ने कहा,
“राहुल भैया का फोन आया और उन्होंने हमसे मुलाकात की। राहुल जी ने न्याय दिलाने का भरोसा दिया है। मुझे भरोसा है कि राहुल गांधी हमको न्याय दिलाकर रहेंगे।”
पीड़िता की तीन बड़ी मांगें
राहुल गांधी से मुलाकात के दौरान पीड़िता ने तीन प्रमुख मांगें रखीं:
- सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा लड़ने के लिए शीर्ष वकील उपलब्ध कराया जाए
– राहुल गांधी ने इस पर सहमति जताते हुए मदद का भरोसा दिया। - परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किसी कांग्रेस-शासित राज्य में स्थानांतरण
– राहुल गांधी ने सुरक्षा को लेकर गंभीरता दिखाते हुए सहयोग का आश्वासन दिया। - पीड़िता के पति को बेहतर नौकरी
– राहुल गांधी ने इस मांग पर भी विचार करने का भरोसा दिलाया।
सोनिया गांधी और राहुल गांधी दोनों ने पीड़िता और उसके परिवार को भरोसा दिलाया कि न्याय और सुरक्षा के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा।
पीएम, गृह मंत्री और राष्ट्रपति से मिलने की गुहार
राहुल गांधी के आवास के बाहर पहुंची पीड़िता ने कहा,
“मैं प्रधानमंत्री, गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रपति से मिलना चाहती हूं। मैं सबको अपनी पीड़ा बताना चाहती हूं।”
पीड़िता का कहना है कि अगर दोषी जेल से बाहर रहा तो उनकी जान को हर वक्त खतरा बना रहेगा।
सबसे बड़ा सवाल
कुलदीप सिंह सेंगर को जमानत मिलने के बाद अब कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं:
- ❓ क्या दोषी को जमानत देना पीड़िता की सुरक्षा से बड़ा है?
- ❓ क्या सिस्टम पीड़िता के डर और मानसिक पीड़ा को नजरअंदाज कर रहा है?
- ❓ क्या हाई-प्रोफाइल मामलों में राजनीतिक दबाव न्याय पर भारी पड़ता है?
- ❓ क्या पीड़िता को आज भी इंसाफ के लिए सड़क पर उतरना पड़ेगा?
- ❓ क्या सरकार पीड़िता और उसके परिवार की सुरक्षा की जिम्मेदारी लेगी?
निष्कर्ष
उन्नाव रेप केस केवल एक कानूनी मामला नहीं, बल्कि न्याय, सुरक्षा और भरोसे की परीक्षा बन चुका है। दोषी को जमानत मिलने के बाद पीड़िता का डर और संघर्ष यह सवाल खड़ा करता है कि क्या पीड़ितों के अधिकार वास्तव में सुरक्षित हैं?
देश की निगाहें अब सरकार, सुप्रीम कोर्ट और सुरक्षा एजेंसियों पर टिकी हैं।








