रिपोर्ट - मो० काजीरूल शेख
पाकुड़: झारखंड के पाकुड़ जिले से प्रधानमंत्री आवास योजना में भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है। हिरणपुर प्रखंड के कई आदिवासी ग्रामीणों ने उपायुक्त (DC) कार्यालय पहुंचकर बिचौलियों पर पैसा गवन करने और उन्हें ठगने का गंभीर आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी रिकॉर्ड में उनके घर 'पूर्ण' दिखा दिए गए हैं, जबकि असलियत में मकानों पर छत तक नहीं है।
क्या है पूरा मामला?
हिरणपुर प्रखंड के केंदुआ पंचायत अंतर्गत तेलोपाड़ा और पहाड़पुर गांव के ग्रामीण मंगलवार को समाहरणालय पहुंचे। ग्रामीणों ने हिरणपुर थाना क्षेत्र के दो तथाकथित बिचौलियों—सलखन हांसदा और बाबूधन टुडू—पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया है।
पीड़ित ग्रामीणों के नाम:
- तेलोपाड़ा गांव: मंगल सोरेन, सनत सोरेन, बधराई हांसदा, बरसन मुर्मू।
- पहाड़पुर गांव: लुखीराम हेंब्रम, बाबूलाल हेंब्रम और बाबूलाल टुडू।
'कागजों पर घर तैयार, जमीन पर अधूरा'
लाभुकों ने बताया कि उन्हें वर्ष 2018 में पीएम आवास योजना का लाभ मिला था। आरोप के अनुसार:
- बिचौलियों ने मकान का काम शुरू तो कराया, लेकिन उसे आधा-अधूरा छोड़कर बीच में ही रोक दिया।
- ऑनलाइन रिकॉर्ड में हेराफेरी कर आवास को 'Complete' (पूर्ण) दिखा दिया गया।
- आवास के नाम पर आने वाली पूरी राशि की निकासी कर ली गई, जबकि ग्रामीणों को फूटी कौड़ी नहीं मिली।
"हम गरीब आदिवासी परिवार से हैं। अधूरे घर में रहना हमारी मजबूरी है। ब्लॉक और पंचायत के चक्कर काट-काट कर थक गए, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई।" — पीड़ित ग्रामीण
जनप्रतिनिधियों पर भी उठाए सवाल
ग्रामीणों ने अपनी व्यथा सुनाते हुए राजनीतिक व्यवस्था पर भी कड़े सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि पाकुड़ जिले में दो आदिवासी विधायक और एक आदिवासी सांसद होने के बावजूद आदिवासियों के साथ ऐसा अन्याय होना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने सवाल किया कि जब नेतृत्व अपने ही समाज के लोगों के हाथ में है, तो गरीबों को हक के लिए दर-दर क्यों भटकना पड़ रहा है?
ग्रामीणों की मांग
लाभुकों ने उपायुक्त को आवेदन सौंपकर दो मुख्य मांगें रखी हैं:
- दोषी बिचौलियों (सलखन हांसदा और बाबूधन टुडू) पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
- उनके अधूरे आवासों को जल्द से जल्द पूरा कराया जाए ताकि वे सुरक्षित छत के नीचे रह सकें।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में जांच कर दोषियों पर क्या कार्रवाई करता है और पीड़ित आदिवासियों को उनका हक कब तक मिलता है।









