वाराणसी, काशी:
काशी में एक अमेरिकी कपल ने सनातन धर्म के प्रति अपनी गहरी आस्था दिखाते हुए वैदिक हिंदू रीति-रिवाज से शादी की। जेसन मात्जनर और लारेन कोजाल ने गंगा किनारे स्थित गौरी केदारेश्वर मंदिर में सुबह-सवेरे सभी पारंपरिक रस्मों का पालन किया। इस अनोखी शादी ने न केवल काशीवासियों का ध्यान खींचा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म के आकर्षण को उजागर किया।
अमेरिकी कपल और उनका भारत से जुड़ाव
जेसन और लारेन पहले से ही भारत और भारतीय संस्कृति के गहरे प्रेमी हैं। जेसन बचपन से काशी और भगवान गणेश के भक्त रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनकी यह चौथी काशी यात्रा थी और वे अपनी शादी में पूरी तरह से वैदिक विधि-विधान अपनाना चाहते थे।
- जेसन पेशे से गिटारिस्ट हैं
- लारेन मार्केटिंग एक्सपर्ट हैं
वैदिक रीति-रिवाज के साथ शादी की सारी रस्में
शादी में काशी के ब्राह्मणों ने संस्कृत वेद मंत्रों का उच्चारण किया और उनका अंग्रेजी में अर्थ समझाया, ताकि अमेरिकी कपल मंत्रों का महत्व और अर्थ समझ सके।
मुख्य रस्मों में शामिल थे:
- कन्या दान
- लावा परछाई
- पाणिग्रहण संस्कार
- वरमाला और सप्तपदी (सात फेरे)
- संकल्प और अन्य पारंपरिक विधियां
इन रस्मों के पूरा होने के बाद जेसन और लारेन सात जन्मों के लिए एक-दूसरे के हमसफर बने।
शादी के बाद रुद्राभिषेक और गंगा आशीर्वाद
शादी के बाद दोनों ने मंदिर में रुद्राभिषेक किया और हर-हर महादेव के जयघोष के साथ भगवान शिव की जटाओं की शोभा बढ़ाई। इसके बाद उन्होंने गंगा तट पर जाकर मां गंगा का आशीर्वाद लिया और प्रणाम किया।
काशीवासियों ने भी बनाया अनोखा अनुभव
शादी में काशीवासियों और स्थानीय श्रद्धालुओं ने भी हिस्सा लिया। उन्होंने घराती और बाराती बनकर वर-वधु पक्ष की रस्मों में भाग लिया। पूरे मंदिर और गंगा किनारे का माहौल भक्ति और उत्साह से भरपूर था।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सनातन धर्म का आकर्षण
जेसन और लारेन की यह शादी यह संदेश देती है कि भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म सिर्फ भारत तक सीमित नहीं हैं। दुनिया भर के लोग भारतीय रीति-रिवाजों और संस्कारों के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त कर सकते हैं।
उनकी शादी ने दिखाया कि सात फेरे, रुद्राभिषेक और गंगा आशीर्वाद जैसी वैदिक रस्में अंतरराष्ट्रीय प्रेमियों को भी आकर्षित कर सकती हैं।









