लातेहार - झारखंड के लातेहार जिले के महुआडांड़ प्रखंड अंतर्गत ओरसा–चंपा घाटी अब सामान्य आवागमन का मार्ग नहीं रह गई है। बल्कि लोग सरकारी लापरवाही के कारण इसे मौत की घाटी कहने लगे हैं। रविवार को ओरसा घाटी में हुए भीषण बस हादसे ने एक बार फिर यह साफ कर दिया कि यह घटना किसी एक कारण से नहीं, बल्कि सिस्टम की सामूहिक विफलता का नतीजा है। इस हादसे में चार महिलाओं सहित 6 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 85 से अधिक यात्री घायल हुए हैं। इनमें से 32 घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिन्हें बेहतर इलाज के लिए रेफर किया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, एक यात्री बस छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से महुआडांड़ प्रखंड के लोध गांव जा रही थी। बस में 90 से अधिक यात्री सवार थे, जो शादी की मंगनी में शामिल होने जा रहे थे। बंगलादारा ओरसा घाटी के अत्यधिक ढलान और खतरनाक मोड़ों पर बस अचानक अनियंत्रित होकर पलट गई। हादसा इतना भयावह था कि कई यात्री घंटों तक बस के नीचे दबे रहे और घटनास्थल पर चीख-पुकार मचती रही। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क निर्माण में सुरक्षा मानकों की खुली धज्जियां उड़ाई गई है।









