JHARKHAND: राज्य के शहरी क्षेत्रों में भिखारियों का सर्वे कराया जायेगा. उनकी पहचान कर सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित की जायेगी. उनको केंद्र व राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा जायेगा. पुनर्वास गृहों का प्रबंध किया जायेगा. नगर विकास विभाग ने सभी नगर निकायों को इससे संबंधित निर्देश दिया है. निकायों को इच्छुक स्वयंसेवी संस्थाओं का चयन कर सर्वे करने को कहा गया है. चयनित गैर सरकारी संस्थाओं का दर्पण पोर्टल पर पंजीकृत होना जरूरी है. यह सब भारत सरकार की ओर से संचालित सपोर्ट फॉर मार्जिनलाइज्ड इंडिविजुअल्स फॉर लाइवलीहुड एंड इंटरप्राइजेज (स्माइल) योजना के तहत किया जा रहा है.
राज्य सरकार ने तैयार कर ली है योजना
योजना के तहत भिखारियों का सर्वेक्षण, पहचान, संग्रहण, सुरक्षा व पुनर्वास गृहों के संचालन के लिए सहायता प्रदान की जाती है. सर्वे के बाद सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा राज्यों को अनुदान उपलब्ध कराया जायेगा. इसका उपयोग शहरों में भीख मांगकर गुजर-बसर कर रहे लोगों का जीवन स्तर उठाने के लिए किया जायेगा. उनको केंद्र व राज्य सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा जायेगा. साथ ही योग्यता के आधार पर उनको रोजगार के लिए व्यवसायिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा.
2011 में राज्य में थे 10819 भिखारी
वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, झारखंड में भिखारियों की संख्या लगभग 10819 थी. इनमें 5522 पुरुष और 5297 महिलाएं शामिल हैं. हालांकि, यह संख्या अन्य बड़े राज्यों की तुलना में कम है, फिर भी यह एक गंभीर सामाजिक चुनौती है. हालांकि जनगणना के 15 साल बाद अब स्थिति कुछ और होगी. इसकी संख्या में काफी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है, जो सरकार के लिए भी एक चुनौती होगी.
क्या है SMILE योजना
केंद्र सरकार की SMILE योजना (Support for Marginalised Individuals for Livelihood and Enterprise) का उद्देश्य विशेष रूप से ट्रांसजेंडर व्यक्तियों और भीख मांगने वाले लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है. SMILE योजना के तहत सरकार ऐसे व्यक्तियों को कौशल विकास, शिक्षा, चिकित्सा सहायता, परामर्श और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराती है, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और सामाजिक-आर्थिक रूप से सशक्त हो सकें. यह योजना केवल सहायता तक सीमित नहीं है. वैसे लोगों को रहने के लिए आवास और समाज में फिर से सम्मानजनक जीवन देना भी इसका उद्देश्य है. सरकार चाहती है कि ट्रांसजेंडरों का कल्याण हो और उन्हें पहचान पत्र, शिक्षा, स्किल ट्रेनिंग और रोजगार से जोड़ा जा सके, जिससे वे सम्मानजनक आजीविका अर्जित कर सकें. वहीं, भिखारियों के पुनर्वास के लिए उन्हें आश्रय, चिकित्सा सुविधा, शिक्षा और कौशल विकास कार्यक्रमों से जोड़ने की व्यवस्था की गई है, ताकि शहरों को धीरे-धीरे भिक्षावृत्ति-मुक्त बनाया जा सके.









