RANCHI: आम आदमी पार्टी (AAP) झारखंड में अपनी राजनीतिक ज़मीन तलाशने में जुटी है। भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से निकली यह पार्टी, जिसने दिल्ली और पंजाब में सत्ता हासिल की, अब झारखंड के स्थानीय मुद्दों को केंद्र में रखकर अपनी मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
हाल ही में पार्टी ने राज्य में 49 सदस्यीय झारखंड राज्य समन्वय समिति का गठन किया है और आगामी निकाय चुनावों के लिए अलग से प्रभारी भी नियुक्त किया है। प्रदेश प्रभारी और सह-प्रभारी लगातार दौरे कर रहे हैं। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि दिल्ली में सत्ता गंवाने के बाद AAP झारखंड में किस संभावना की तलाश कर रही है।
संगठन विस्तार और जनसंपर्क पर ज़ोर
AAP के झारखंड मीडिया प्रभारी प्रभात शर्मा ने बताया कि पार्टी राज्य में एक सशक्त और आम जनता के प्रति समर्पित संगठन तैयार करने पर काम कर रही है। उन्होंने कहा, “दिल्ली और पंजाब में हमने जनता की समस्याओं को मुद्दा बनाकर सफलता हासिल की। झारखंड में भी सड़क, सुरक्षा, शिक्षा और विधि-व्यवस्था जैसी समस्याएं व्यापक हैं। ऐसे में पार्टी इन मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाएगी।”
उन्होंने कहा कि निकाय चुनाव पार्टी के लिए अहम हैं। “हर गली, वार्ड और घर तक पहुंचने की रणनीति बनाई जा रही है। यह चुनाव जनता के बीच AAP की विचारधारा को मजबूत करने का मौका होगा,” शर्मा ने कहा।
निकाय चुनाव पर नज़र
राज्य निर्वाचन आयोग के मुताबिक, निकाय चुनाव फरवरी 2026 के अंत तक कराए जा सकते हैं। अधिसूचना जनवरी के अंत में जारी होने की संभावना है और मतदान बैलेट पेपर से होगा। AAP ने पहले ही घोषणा की है कि वह इन चुनावों को पूरी ताकत से लड़ेगी।
AAP की बढ़ती सक्रियता पर झारखंड की प्रमुख पार्टियों ने इसे हल्के में लिया है।
झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता मनोज पांडेय ने कहा, “AAP अभी झारखंड की राजनीति में नर्सरी के विद्यार्थी जैसी है। यहां अनुभवी दलों का दबदबा है। निकाय चुनाव में भी AAP का असर नहीं दिखेगा।” कांग्रेस के प्रदेश महासचिव राकेश सिन्हा ने कहा, “हर पार्टी चुनाव लड़ना चाहती है। लेकिन AAP को अपनी ताकत और सीमाओं का अंदाज़ा होना चाहिए। दिल्ली में उनका अहंकार टूटा है, झारखंड में भी स्थिति कुछ अलग नहीं होगी।”
भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक ने इसे पूरी तरह खारिज करते हुए कहा, “AAP कुकुरमुत्ता जैसी पार्टी है, जो बिना नीति-सिद्धांत के चल रही है। झारखंड की राजनीति पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।”
चुनौतियां और संभावनाएं
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि झारखंड की राजनीति अब भी क्षेत्रीय दलों (जैसे झामुमो) और राष्ट्रीय दलों (भाजपा, कांग्रेस) के इर्द-गिर्द घूमती है। ऐसे में AAP को यहां पैर जमाने में वक्त लगेगा। हालांकि, स्थानीय निकाय चुनाव पार्टी के लिए पहला बड़ा राजनीतिक टेस्ट साबित हो सकते हैं।
अगर AAP शहरी मुद्दों — भ्रष्टाचार, बुनियादी सुविधाओं और जनसेवाओं — पर फोकस कर जनता से जुड़ने में सफल रही, तो यह भविष्य में विधानसभा चुनावों में भी असर दिखा सकती है।
कुल मिलाकर, आम आदमी पार्टी झारखंड में ‘आम आदमी’ की आवाज़ बनकर उभरने की कोशिश कर रही है, लेकिन स्थानीय राजनीतिक समीकरण इसे आसान नहीं बनाएंगे। आने वाले निकाय चुनाव यह तय करेंगे कि झारखंड की राजनीति में AAP के लिए कितनी गुंजाइश बची है।









