(रमण कुमार, संवाददाता, मधेपुरा)
मधेपुरा - बिहार के मधेपुरा में इन दिनों आस्था का ऐसा महासंगम दिख रहा है, जहां लोकविश्वास, परंपरा और चमत्कार की कहानियां एक साथ जीवंत हो उठी हैं। पशुपालकों के देवता माने जाने वाले बाबा विशुराउत धाम में चार दिवसीय राजकीय मेले का भव्य आगाज़ हुआ है। मान्यता ऐसी कि यहां बाबा को चढ़ाया गया दूध फटता नहीं और यही विश्वास हर साल हजारों-लाखों श्रद्धालुओं को इस धाम तक खींच लाता है।
चार दिवसीय राजकीय मेले का उद्घाटन प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया। बाबा विशुराउत को इलाके में पशुपालकों के रक्षक देवता के रूप में माना जाता है। स्थानीय लोगों की मान्यता है कि बाबा की कृपा से पशुधन सुरक्षित रहता है, बीमारियां दूर होती हैं और घरों में समृद्धि आती है। यहां आयोजित मेले की बात करें तो मेले में पूजा-अर्चना के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम, झूले, ग्रामीण बाजार और अस्थायी दुकानों की भी रौनक है। पूरा पचरासी क्षेत्र इस समय भक्ति और उत्सव के रंग में रंगा हुआ है। वहीं श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा, ट्रैफिक नियंत्रण, साफ-सफाई और मेडिकल सुविधा की विशेष व्यवस्था की है।











