लखनऊ: उत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया संपन्न होने के बाद निर्वाचन आयोग ने अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी है। इस व्यापक सफाई अभियान के परिणामस्वरूप राज्य की मतदाता सूची से दो करोड़ चार लाख से अधिक नाम हटा दिए गए हैं। आयोग द्वारा 10 अप्रैल 2026 को साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, अब उत्तर प्रदेश में कुल मतदाताओं की संख्या 13 करोड़ 39 लाख 84 हजार 792 रह गई है। अक्टूबर 2025 से अप्रैल 2026 तक चले इस अभियान का मुख्य उद्देश्य अयोग्य, डुप्लिकेट और लंबे समय से अनुपस्थित मतदाताओं को सूची से बाहर करना था।
इस पुनरीक्षण प्रक्रिया का सबसे चौंकाने वाला असर शहरी विधानसभा क्षेत्रों में देखने को मिला है, जहां मतदाताओं की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। आंकड़ों के मुताबिक, लखनऊ कैंट जैसी प्रमुख सीट पर करीब 34.18 प्रतिशत नाम हटाए गए हैं, जबकि प्रयागराज उत्तर में 34 प्रतिशत और लखनऊ पूर्व में 31 प्रतिशत की कमी आई है। इसके विपरीत ग्रामीण अंचलों में यह बदलाव काफी कम रहा, जहां केवल 4 से 6 प्रतिशत नाम ही सूची से बाहर हुए हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने स्पष्ट किया कि प्रदेश के सभी 75 जिलों और 403 विधानसभा क्षेत्रों में बूथ लेवल अधिकारियों की टीम ने घर-घर जाकर इस जमीनी सर्वेक्षण को अंजाम दिया है।
मतदाता सूची में हुए इस बड़े फेरबदल ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। विशेषकर शहरी और वीआईपी सीटों पर वोटरों की संख्या कम होने से राजनीतिक दलों के पुराने जातीय और सामाजिक समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए सभी दलों के रणनीतिकार अब नए डेटा के आधार पर बूथ स्तर की प्लानिंग और उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया पर दोबारा विचार कर रहे हैं। चुनाव आयोग ने आम जनता से अपील की है कि वे आधिकारिक वेबसाइटों voters.eci.gov.in या ceouttarpradesh.nic.in पर जाकर अपना नाम सुनिश्चित करें, ताकि लोकतंत्र की इस बुनियादी प्रक्रिया में पारदर्शिता और वास्तविक मतदाताओं की भागीदारी बनी रहे।











