नई दिल्ली: भारत और चीन के बीच सीमा विवाद अब फिल्मी पर्दे पर भी गरमाता नजर आ रहा है। सलमान खान स्टारर अपकमिंग फिल्म 'बैटल ऑफ गलवान' (Battle of Galwan) को लेकर चीनी मीडिया द्वारा लगाए गए आरोपों को भारत सरकार ने सिरे से खारिज कर दिया है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, भारत ने स्पष्ट किया है कि यहाँ फिल्म निर्माताओं को अपनी कला और अभिव्यक्ति की पूरी स्वतंत्रता है।
क्या है पूरा विवाद?
चीनी सरकारी अखबार 'ग्लोबल टाइम्स' ने एक लेख के जरिए दावा किया था कि सलमान खान की यह फिल्म जून 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प के तथ्यों को "तोड़-मरोड़ कर" पेश करती है। चीन ने आरोप लगाया कि बॉलीवुड फिल्में भावनात्मक रूप से प्रेरित होती हैं और इतिहास को नहीं बदल सकतीं।
इसके जवाब में भारत सरकार के सूत्रों ने कहा:
"भारत एक लोकतांत्रिक देश है जहाँ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है। सिनेमाई अभिव्यक्ति इसी का हिस्सा है। भारतीय फिल्म निर्माता कलात्मक स्वतंत्रता के साथ फिल्में बनाने के लिए स्वतंत्र हैं। यदि किसी को आपत्ति है, तो वे रक्षा मंत्रालय से स्पष्टीकरण मांग सकते हैं, क्योंकि इस फिल्म के निर्माण में सरकार की कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं है।"
कर्नल संतोष बाबू की भूमिका में दिखेंगे सलमान खान
यह फिल्म शिव अरूर और राहुल सिंह की चर्चित किताब ‘इंडियाज मोस्ट फियरलेस 3’ की एक सच्ची कहानी पर आधारित है। फिल्म में सलमान खान कर्नल बिक्कुमल्ला संतोष बाबू का किरदार निभा रहे हैं।
- कर्नल संतोष बाबू: 16 बिहार रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफिसर, जिन्होंने गलवान में चीनी पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के सैनिकों से लड़ते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया था।
- शहादत का आंकड़ा: भारत ने आधिकारिक तौर पर इस झड़प में अपने 20 जांबाज सैनिकों को खोने की बात स्वीकार की थी। वहीं, चीन ने लंबे समय तक चुप्पी साधने के बाद केवल 4 सैनिकों की मौत की बात कही, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संदेहास्पद माना गया।
चीन के 'झूठे' दावों पर पलटवार
ग्लोबल टाइम्स ने अपने लेख में यह हास्यास्पद दावा भी किया कि गलवान घाटी चीन के संप्रभु क्षेत्र में आती है और झड़प के लिए भारतीय सैनिकों को जिम्मेदार ठहराया। हालांकि, ऐतिहासिक तथ्यों और एलएसी (LAC) की स्थिति चीन के इन दावों को पूरी तरह खारिज करती है।
2020 की उस घटना के बाद से ही भारत और चीन के बीच लद्दाख सीमा पर तनाव बना हुआ है, जिसे देखते हुए भारत ने एलएसी पर अपनी सैन्य उपस्थिति और निगरानी को काफी मजबूत कर दिया है।
बैटल ऑफ गलवान' न केवल एक फिल्म है, बल्कि यह भारतीय सैनिकों के शौर्य की गाथा है। चीन की बौखलाहट यह साफ दर्शाती है कि वैश्विक स्तर पर भारत का नैरेटिव मजबूत हो रहा है।









