रिपोर्ट - चंदन कुमार
समस्तीपुर (वारिसनगर) — समस्तीपुर जिले के वारिसनगर प्रखंड अंतर्गत हांसा पंचायत के वार्ड संख्या 7 में संचालित आंगनवाड़ी केंद्र संख्या 239 की हालत देखकर किसी का भी दिल दहल जाए। बच्चों के भविष्य को संवारने वाला यह केंद्र आज खुद बदहाली और लापरवाही का शिकार है।
टूटी-फूटी झोपड़ी में संचालित केंद्र
यह आंगनवाड़ी केंद्र एक बांध पर, कचरे के ढेर के बीच बनी टूटी-फूटी झोपड़ी में चल रहा है। जिस जगह पर नौनिहाल बच्चे बैठते हैं, वहां जमीन समतल तक नहीं है और पूरा इलाका गड्ढों से भरा हुआ है। बारिश या हल्की चूक की स्थिति में यहां कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
संचालिका दो महीने से अनुपस्थित
संवाददाता ने मौके पर जाकर जानकारी लेने की कोशिश की तो खुलासा हुआ कि संचालिका खुशबू कुमारी लगभग दो महीने से नियमित रूप से केंद्र में नहीं आ रही हैं। सहायिका ने नाम न छापने की शर्त पर बताया:
“बच्चों को पढ़ाना, खाना बनाना, सब कुछ हम ही संभाल रहे हैं। कई बार तो अकेले ही पूरा केंद्र चलाना पड़ता है।”
बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल
झोपड़ी की जर्जर हालत, कचरे का अंबार और असमान जमीन यह साफ संकेत दे रहे हैं कि यहां पढ़ने वाले मासूम बच्चे किसी भी वक्त दुर्घटना का शिकार हो सकते हैं।
शिक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
यह मामला बिहार सरकार की शिक्षा और बाल विकास व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। करोड़ों रुपये के बजट और योजनाओं के बावजूद यदि आंगनवाड़ी केंद्र इस हाल में हैं, तो योजनाओं का लाभ कहाँ जा रहा है?
जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की चुप्पी
स्थानीय मुखिया, पंचायत प्रतिनिधि और प्रखंड स्तरीय अधिकारी सब कुछ जानते हुए भी अनदेखा कर रहे हैं। सवाल उठ रहे हैं:
- क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही कार्रवाई होगी?
- क्या गरीब बच्चों की जान की कोई कीमत नहीं?
- क्या आंगनवाड़ी सिर्फ कागजों में ही चल रही है?
प्रशासन से ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन से तुरंत कार्रवाई की मांग की है:
- सुरक्षित भवन उपलब्ध कराना।
- अनुपस्थित संचालिका पर कड़ी कार्रवाई।
- पूरे प्रखंड के आंगनवाड़ी केंद्रों की जांच।
यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह लापरवाही किसी दिन बड़ी त्रासदी में बदल सकती है।









